KGMU धर्मांतरण मामला मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी में, जांच में STF सक्रिय: यूपी महिला आयोग अध्यक्ष
लखनऊ (उत्तर प्रदेश), 16 जनवरी। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए कथित धार्मिक धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है तथा इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की जा रही है, जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि ‘लव जिहाद’ और संगठित धर्मांतरण से जुड़ा गंभीर अपराध प्रतीत होता है।
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KGMU मामला मुख्यमंत्री की निगरानी
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STF जांच में पूरी सक्रियता
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संगठित नेटवर्क की आशंका गहरी
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नारेबाजी पर FIR नहीं
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डॉ. रमीज पर गंभीर आरोप
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विशाखा समिति में दोषी साबित
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महिला सुरक्षा पर सख्त रुख
मुख्यमंत्री की निगरानी में जांच
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि अब तक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे यह संकेत मिलता है कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। उन्होंने बताया कि आरोपी डॉक्टर रमीज के संबंध दूर-दूर तक फैले हुए थे और कई ऐसे संकेत मिले हैं, जो बताते हैं कि वह कोई साधारण या छोटा अपराधी नहीं था। महिला आयोग अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच पहले से ही चल रही है और विश्वविद्यालय परिसर में हाल ही में हुए नारेबाजी प्रकरण को लेकर अलग से एफआईआर दर्ज कराने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “यह जांच का विषय है और जांच पहले से जारी है। STF इस पूरे प्रकरण को देख रही है। जब जांच पूरी हो जाएगी, तब स्थिति अपने आप स्पष्ट हो जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले में लगातार अपडेट दिया जा रहा है और सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।
अपर्णा बिष्ट यादव के दौरे पर सफाई-एक व्यक्ति नहीं, संगठित नेटवर्क
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव के KGMU दौरे को लेकर भी बबीता सिंह चौहान ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अपर्णा बिष्ट यादव विश्वविद्यालय परिसर में केवल जानकारी एकत्र करने गई थीं और उनकी जांच में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। “वह वहां सूचना लेने गई थीं। जब उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं मिली, तो संभव है कि उनके समर्थकों ने नारेबाजी की हो। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस विषय में किसी एफआईआर की जरूरत है,” उन्होंने कहा।
डॉ. रमीज पर गंभीर आरोप
बबीता सिंह चौहान ने आरोपी डॉक्टर रमीज पर लगे आरोपों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मामला किसी भी दृष्टि से हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “यह लव जिहाद और धर्मांतरण से जुड़ा मामला है। रमीज के संपर्क बहुत व्यापक थे। कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे लगता है कि वह अकेले नहीं, बल्कि एक गिरोह के साथ लंबे समय से सक्रिय था। किस तरह और किस हद तक यह गिरोह काम कर रहा था, यह अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान कुछ गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच, KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने भी मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पुष्टि की कि विश्वविद्यालय की विशाखा समिति की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी छात्र दोषी पाया गया है और अब उसे KGMU में अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने ANI से बातचीत में बताया कि विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था, जिसके बाद मुख्यमंत्री को समिति के निष्कर्षों से अवगत कराया गया।
प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने कहा, “विशाखा समिति की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी छात्र दोषी पाया गया है। KGMU प्रशासन ने निर्णय लिया है कि वह यहां अपना कोर्स जारी नहीं रख सकता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन महिला सुरक्षा और गरिमा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
दौरे में KGMU प्रशासन ने बाधा डाली
गौरतलब है कि यह विवाद 9 जनवरी को उस समय और बढ़ गया था, जब महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव ने आरोप लगाया कि KGMU प्रशासन ने उनके दौरे में बाधा डाली और महिला डॉक्टरों द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका दौरा केवल डॉक्टर रमीज से जुड़े मामले तक सीमित नहीं था, बल्कि महिला आयोग के पास पहले से दर्ज दो अन्य गंभीर शिकायतों से भी संबंधित था। इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, राज्य सरकार और महिला आयोग का दावा है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। STF की सक्रियता, मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी और विश्वविद्यालय स्तर पर की गई कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले को किसी भी सूरत में दबने नहीं देना चाहती।कुल मिलाकर, KGMU का यह मामला अब केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में STF की जांच पूरी होने के बाद कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिन पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।