भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने जा रहा है स्पाइस‑1000…बालाकोट एयरस्ट्राइक उड़ा चुका है पाकिस्तान की नींद
बालाकोट एयरस्ट्राइक में पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाले जिस घातक हथियार ने दुनिया का ध्यान खींचा था, वही हथियार अब एक बार फिर भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने जा रहा है। भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स से करीब 1000 स्पाइस‑1000 प्रिसिजन गाइडेंस किट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को भारतीय वायु सेना (IAF) की स्ट्राइक क्षमता को नई धार देने वाला अहम कदम माना जा रहा है।
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भारत ने स्पाइस-1000 खरीदा
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DAC ने इजरायल से मंजूरी
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125 किलोमीटर लंबी रेंज बम
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बालाकोट स्ट्राइक में प्रयोग हुआ
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एंटी-जैमिंग और सटीक हमला
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IAF की गहरे हमले क्षमता
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रक्षा आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम
स्पाइस‑1000 एक अत्याधुनिक स्टैंड‑ऑफ ग्लाइड बम किट है, जो साधारण अनगाइडेड बम को स्मार्ट और बेहद सटीक हथियार में बदल देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 100 से 125 किलोमीटर की दूरी से लक्ष्य को भेद सकता है। यानी भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर रहते हुए गहरे इलाके में सटीक हमला कर सकेंगे। यही क्षमता इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला मौजूदा ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। हाल के वर्षों में सीमाओं पर बढ़ते तनाव और आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए लंबी दूरी से सटीक हमला करने वाले हथियारों की जरूरत और बढ़ गई है। स्पाइस‑1000 की एंटी‑जैमिंग तकनीक इसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के माहौल में भी प्रभावी बनाए रखती है।
भारत का स्पाइस फैमिली से पुराना और सफल अनुभव रहा है। वर्ष 2019 में हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक में भारतीय वायु सेना ने स्पाइस‑2000 प्रिसिजन गाइडेंस किट का इस्तेमाल किया था। उस ऑपरेशन में पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए गए थे, जिसने भारत की सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश दिया था। इसके बाद भारत ने स्पाइस‑2000 की इमरजेंसी खरीद भी की थी। स्पाइस‑1000, स्पाइस‑2000 और हल्के घरेलू ग्लाइड बम्स के बीच की दूरी को भरता है। यह विशेष रूप से 500 किलोग्राम (1000 पाउंड क्लास) के बमों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन करीब 453 से 500 किलोग्राम के बीच होता है और इसे Mk‑83 जैसे बमों पर आसानी से लगाया जा सकता है। इसकी डिजाइन ऐसी है कि इसे विभिन्न लड़ाकू विमानों पर सरलता से इंटीग्रेट किया जा सकता है।
इस बम की तकनीकी विशेषताएं इसे और भी घातक बनाती हैं। इसमें इलेक्ट्रो‑ऑप्टिकल सीन‑मैचिंग, जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) का संयोजन है। खास बात यह है कि यह जीपीएस‑इंडिपेंडेंट मोड में भी काम कर सकता है, यानी दुश्मन द्वारा जीपीएस जैम किए जाने पर भी यह लक्ष्य तक सटीक पहुंच सकता है। इसका सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) तीन मीटर से भी कम है, जो इसे कमांड सेंटर, बंकर और एयरफील्ड जैसे हाई‑वैल्यू टारगेट्स के लिए आदर्श बनाता है।
स्पाइस‑1000 को भारतीय वायु सेना के राफेल, सुखोई‑30 एमकेआई और भविष्य में तेजस जैसे लड़ाकू विमानों पर इंटीग्रेट किए जाने की संभावना है। इससे IAF की मल्टी‑प्लेटफॉर्म स्ट्राइक क्षमता और मजबूत होगी। लॉन्च के बाद यह हथियार पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से लक्ष्य तक पहुंचता है और एक साथ कई लक्ष्यों पर हमले की क्षमता भी रखता है। हालांकि भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्वदेशी ग्लाइड बम ‘गौरव’ जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्पाइस‑1000 की परिपक्व तकनीक और तुरंत उपलब्धता ने इसे प्राथमिक विकल्प बना दिया। यह फैसला स्वदेशी विकास और आयात के बीच संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रणनीतिक दृष्टि से यह सौदा भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को भी दर्शाता है। SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच भारत इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का लगभग 34 प्रतिशत हिस्सा रहा है, जिससे भारत उसका सबसे बड़ा रक्षा ग्राहक बनता है। सैन्य जानकारों का कहना है कि स्पाइस‑1000 की खरीद से भारतीय वायु सेना को गहरे, सटीक और सुरक्षित हमलों की क्षमता मिलेगी। इससे आतंकवाद विरोधी अभियानों में मजबूती आएगी और सीमाओं पर भारत की प्रतिरोधक क्षमता और प्रभावी होगी। कुल मिलाकर, यह सौदा भारत के रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी असर डाल सकता है।