3 मार्च को खगोलीय अद्भुत दृश्य: लालिमा लिए दिखेगा चंद्रमा
3 मार्च की शाम भारत के आकाश में एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी, जब पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा गहरे लाल रंग में नजर आएगा। इस अनोखे दृश्य को आम भाषा में ब्लड मून कहा जाता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच सीधे आ जाती है, तब सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। हालांकि, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की किरणों को मोड़कर कुछ प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचा देता है। नीली किरणें वायुमंडल में बिखर जाती हैं, जबकि लाल रंग की लंबी तरंगें चंद्रमा की सतह तक पहुंचती हैं। यही कारण है कि चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग में चमकता दिखाई देता है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को रेले प्रकीर्णन (Rayleigh Scattering) कहा जाता है, जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश के लाल दिखने का भी कारण है।
वायुमंडल की भूमिका क्या है?
यदि पृथ्वी के पास वायुमंडल न होता, तो पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पूरी तरह अंधकारमय दिखता। लेकिन वायुमंडल एक लेंस की तरह कार्य करता है और सूर्य की किरणों को मोड़कर चंद्रमा पर लालिमा बिखेर देता है। लाल रंग की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि उस समय पृथ्वी के वातावरण में धूल, बादल या ज्वालामुखीय राख कितनी मात्रा में मौजूद है।
भारत में कब दिखाई देगा ब्लड मून?
भारत में यह खगोलीय दृश्य शाम के समय दिखाई देगा।
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पूर्ण ग्रहण प्रारंभ: शाम 5:21 बजे (IST)
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पूर्ण ग्रहण समाप्त: शाम 6:23 बजे (IST)
यह दृश्य चंद्रमा के उदय होते ही शुरू होगा। चूंकि उस समय चंद्रमा क्षितिज के पास रहेगा, इसलिए वह सामान्य से बड़ा दिखाई दे सकता है। इसे “मून इल्यूजन” प्रभाव कहा जाता है।
कितनी देर तक लाल रहेगा चंद्रमा?
पूर्ण ग्रहण की अवस्था, जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया (अम्ब्रा) में रहेगा, लगभग 1 घंटा 2 मिनट तक रहेगी।
इसी अवधि के दौरान चंद्रमा पूरी तरह लाल रंग में नजर आएगा।
बेहतर दृश्य के लिए सुझाव
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पूर्व दिशा में खुला और साफ स्थान चुनें।
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ऊंची इमारतों या पेड़ों से दूर रहें।
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दूरबीन या टेलीस्कोप से दृश्य और स्पष्ट दिखाई देगा।
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इस ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है।
3 मार्च की शाम भारत में खगोल प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर लेकर आ रही है। लगभग एक घंटे तक लाल रंग में चमकता चंद्रमा आकाश में एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करेगा। यह दुर्लभ क्षण प्रकृति और विज्ञान के अद्भुत मेल का शानदार उदाहरण है।





