जानें क्यों है शुभंकर बीजेपी लिए सोमनाथ… यहीं निकला था बीजेपी के लिए 2 सीट से केन्द्र की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता

Somnath mascot BJP found its way from two seats to central power

जानें क्यों है शुभंकर बीजेपी लिए सोमनाथ… यहीं निकला था बीजेपी के लिए 2 सीट से केन्द्र की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता

सोमनाथ सिर्फ एक प्राचीन ज्योतिर्लिंग नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से भी बेहद शुभ माना जाता है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कई घटनाएं बीजेपी के लिए “लकी फैक्टर” साबित हुई हैं। बीजेपी के बड़े फैसलों, चुनावी सफलताओं और सत्ता में मजबूती के संकेत अक्सर सोमनाथ दर्शन के बाद देखने को मिले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से शुरू हुई रथ यात्रा न सिर्फ भारतीय राजनीति बल्किी बीजेपी के लिए भी एक ‘महत्वपूर्ण मोड़’ थी।

इस यात्रा के चलते न केवल बीजेपी और आडवाणी, बल्कि देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। 1989 में हुए लोकसभा के चुनाव में बीजेपी ने पहली बार अपने चुनावी घोषणापत्र में राम मंदिर अयोध्या निर्माण के मुद्दे को शामिल किया था। इसका परिणाम यह निकला कि जहां 1989 से पहले 1984 में हुए लोकसभा के चुनाव में 224 सीटों पर चुनाव लड़कर भी महज दो सीटें जीतने वाली बीजेपी ने साल 1989 के चुनाव में लोकसभा की 85 सीटों पर जीत हासिल की थी।

माना जाता है कि बीजेपी के शीर्ष नेता अहम चुनावों या बड़े राजनीतिक फैसलों से पहले सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करते रहे हैं। चाहे गुजरात विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, कई मौकों पर जीत से पहले पार्टी नेताओं का सोमनाथ दर्शन चर्चा में रहा। यही कारण है कि सोमनाथ को बीजेपी के लिए आस्था के साथ-साथ विजय का प्रतीक भी माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सोमनाथ से गहरा नाता रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी नरेन्द्र मोदी ने कई बार सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। बाद में राष्ट्रीय राजनीति में बड़े कद तक पहुंचने और लगातार चुनावी सफलताओं के साथ सोमनाथ का नाम “शुभ संकेत” के रूप में जुड़ता चला गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमनाथ दर्शन बीजेपी की सांस्कृतिक राजनीति और हिंदुत्व के एजेंडे को भी मजबूती देता है। इससे पार्टी का कोर वोटबैंक भावनात्मक रूप से जुड़ता है और चुनावी माहौल में सकारात्मक संदेश जाता है। इसी वजह से हर बार जब बीजेपी के बड़े नेता सोमनाथ पहुंचते हैं, तो सियासी हलकों में यह चर्चा तेज हो जाती है कि आने वाले दिनों में पार्टी के लिए कोई बड़ा और सकारात्मक राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

गुजरात ही नहीं साउथ में भी जीत हासिल करने की रणनीति

गुजरात में अगले साल विधानसभा के चुनाव है। इसके साथ ही बीजेपी साउथ को भी जीतने के लिए अपनी रणनीति बना रही है। जिसे लेकर एक बार फिर सोमनाथ खासा चर्चा में है। सोमनाथ सुर्खियों में है। जानें सोमनाथ क्यों ट्रेंड कर रहा है। मोदी जी क्यों स्वाभिमान पर्व मना रहे हैं? इससे पहले जान लें कि नरेंद्र मोदी प्रचारक के तौर पर सोमनाथ के द्वार पर गए। नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सोमनाथ के द्वार पर माथा टेका। अब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर सोमनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना की। भारतीय जनता पार्टी दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए नई और बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। इसी रणनीति के केंद्र में एक बार फिर सोमनाथ आ गया है। यही वजह है कि इन दिनों सोमनाथ लगातार सुर्खियों में है और राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक ट्रेंड कर रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर सोमनाथ क्यों चर्चा में है और इसका बीजेपी की साउथ रणनीति से क्या संबंध है। बीजेपी लंबे समय से दक्षिण भारत में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक प्रतीकों के जरिए दक्षिण के मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत किया जा सकता है। सोमनाथ, जो देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, इसी सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का बड़ा प्रतीक है। इसलिए जब बीजेपी साउथ मिशन की बात करती है, तो सोमनाथ का उल्लेख अपने आप राजनीतिक रूप से अहम हो जाता है।

कई मायनों में खास है स्वाभिमान पर्व

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मनाया जा रहा ‘स्वाभिमान पर्व’ भी खास महत्व रखता है। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, आत्मगौरव और ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने का संदेश देता है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़कर देखती है, जिसका असर देश के हर हिस्से, खासकर दक्षिण भारत तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सोमनाथ से नरेंद्र मोदी का रिश्ता भी इस चर्चा को और मजबूत करता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में एक प्रचारक के रूप में सोमनाथ के द्वार पर कदम रखा था। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री बनने पर भी उन्होंने कई बार सोमनाथ मंदिर में माथा टेका और पूजा-अर्चना की। अब प्रधानमंत्री के रूप में एक बार फिर उनका सोमनाथ दर्शन करना केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश माना जा रहा है।

आस्था, इतिहास और राष्ट्रवाद का मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मोदी का सोमनाथ से जुड़ाव बीजेपी की उस राजनीति को दर्शाता है, जिसमें आस्था, इतिहास और राष्ट्रवाद को एक सूत्र में पिरोया जाता है। दक्षिण भारत में जहां क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक गर्व बेहद अहम है, वहां सोमनाथ जैसे प्रतीक के जरिए बीजेपी खुद को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। यही कारण है कि जब-जब सोमनाथ का जिक्र आता है, सियासी हलचल तेज हो जाती है। साउथ मिशन, स्वाभिमान पर्व और प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ दर्शन ने मिलकर इस ऐतिहासिक तीर्थ को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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