सार्वजनिक समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ के 6 छंद अनिवार्य
जानें क्या हैं नए नियम और कौन से हैं पूरे छह छंद
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब आधिकारिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और सभी स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ के छहों छंद गाना या बजाना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन छह छंदों की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी और उसी निर्धारित संस्करण का पालन करना होगा।
किन मौकों पर लागू होगा नियम?
नई गाइडलाइंस के अनुसार यह नियम निम्न अवसरों पर लागू होगा। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम। राष्ट्रपति के आगमन और उनके भाषण से पहले और बाद। राष्ट्र के नाम संबोधन। राज्यपालों के आगमन और उनके आधिकारिक कार्यक्रम। सभी सरकारी आयोजन और स्कूल कार्यक्रम। अब तक आमतौर पर ‘वंदे मातरम्’ का पहला या अधिकतम दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नए निर्देशों के बाद सभी छह छंदों को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
ये हैं ‘वंदे मातरम्’ के वो 6 छंद?
‘वंदे मातरम्’ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित गीत है, जो उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल था। यह गीत भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बना और बाद में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। अब सरकार द्वारा जिन छह छंदों को अनिवार्य किया गया है, वे इस प्रकार हैं
छंद 1
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।
शस्यशामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।
सुखदां वरदां मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 2
वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।
रिपुदलवारिणीं मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 3
वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म।
तुमि हृदि, तुमि मर्म।
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति।
हृदये तुमि मा भक्ति।
तोमारई प्रतिमा गडि।
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 4
वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।
कमला कमलदलविहारिणी।
वाणी विद्यादायिनी।
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलां अमलां अतुलां।
सुजलां सुफलां मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 5
वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।
धरणीं भरणीं मातरम्।
शत्रु-दल-वारिणीं।
मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।
छंद 6
वन्दे मातरम्।
त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।
त्वं हि शक्ति मातरम्।
वन्दे मातरम्।।
सरकार का तर्क क्या है?
मोदी सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की सांस्कृतिक और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक है। छहों छंदों को शामिल करने से गीत की पूर्ण भावना और मूल स्वरूप सामने आएगा। यह निर्णय राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रमों में निर्धारित 3 मिनट 10 सेकंड के ऑडियो या गायन संस्करण का ही प्रयोग किया जाएगा, ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे।
‘वंदे मातरम्’ पर पहले भी रहा है विवाद
‘वंदे मातरम्’ को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। पिछले वर्ष इसके 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में चर्चा की मांग के दौरान भी बयानबाजी हुई थी। उस समय सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने इसके कुछ छंदों में देवी स्वरूप वर्णन को लेकर आपत्ति जताई थी, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक बयान में इतिहास के संदर्भ में कहा था कि स्वतंत्रता काल में इस गीत को लेकर मतभेद रहे थे। इस टिप्पणी के बाद भी राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई थी।
केन्द्र सरकार के नए निर्देश लागू होने के बाद अब सभी सरकारी संस्थानों और स्कूलों को अपने कार्यक्रमों की रूपरेखा में बदलाव करना होगा। आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगान के बाद पूरे छह छंदों का गायन अनिवार्य होगा। हालांकि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को लेकर चर्चा और बहस जारी रहने की संभावना है। फिलहाल केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण छह छंदों वाला संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।