EXCLUSIVE REPORT: अब हार्ट, किडनी और डायबिटीज का इलाज होगा साथ! नई मेडिकल गाइडलाइन ने बदली गंभीर बीमारियों के इलाज की रणनीति

Simultaneous treatment of heart kidney and metabolic diseases

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा या किडनी की बीमारी है, तो अब केवल एक बीमारी का इलाज कराना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाओं ने पहली बार ऐसी गाइडलाइन जारी की है, जिसमें कहा गया है कि हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों का इलाज एक साथ किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों समस्याएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं और यदि इनमें से किसी एक को नजरअंदाज किया गया, तो दूसरी बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।

नई गाइडलाइन ने बदली इलाज की सोच

हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA), अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC), अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ASN) ने मिलकर कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम के लिए पहली आधिकारिक क्लिनिकल गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन का सबसे बड़ा संदेश है हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियां अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इनका इलाज भी समग्र (Integrated) तरीके से किया जाना चाहिए। 

क्या है CKM सिंड्रोम?

CKM यानी Cardiovascular-Kidney-Metabolic Syndrome ऐसी स्थिति है, जिसमें

एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और समय के साथ मरीज की स्थिति को अधिक गंभीर बना देते हैं।

चार स्टेज में बढ़ता है खतरा

स्टेज-1

शुरुआत मोटापे और प्री-डायबिटीज से होती है।

इस दौरान—

जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं।

स्टेज-2

बीमारी आगे बढ़ने पर—

जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

स्टेज-3

इस चरण में—

के शुरुआती संकेत मिलने लगते हैं।

स्टेज-4

सबसे गंभीर स्थिति में मरीज को—

का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

एक बीमारी दूसरी को कैसे बढ़ाती है?

विशेषज्ञों के अनुसार— यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।

किडनी खराब होने पर—

वहीं हार्ट कमजोर होने पर किडनी तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जिससे किडनी की कार्यक्षमता और घटने लगती है।

यानी यह एक दुष्चक्र (Vicious Cycle) बन जाता है।

एक साथ इलाज क्यों जरूरी?

नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. राजशेखर चक्रवर्ती मदारासु के अनुसार—

हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों का अलग-अलग इलाज करने से कई बार बीमारी की जड़ छूट जाती है।

यदि तीनों अंगों की स्थिति को एक साथ मॉनिटर किया जाए—

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि लगातार—

तो यह केवल एक बीमारी नहीं बल्कि CKM सिंड्रोम का संकेत भी हो सकता है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

जो लोग—

उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों के अनुसार CKM सिंड्रोम से बचाव पूरी तरह जीवनशैली पर निर्भर करता है।

अपनाएं ये आदतें—

समय रहते जांच क्यों जरूरी?

CKM सिंड्रोम की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कई मरीज तब तक सामान्य जीवन जीते रहते हैं, जब तक—

जैसी गंभीर स्थिति सामने नहीं आ जाती। इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप समय रहते बीमारी पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। नई मेडिकल गाइडलाइन स्पष्ट करती है कि हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों को अब अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या किडनी की बीमारी है, तो उसके हृदय और किडनी की नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है। समय पर समग्र उपचार अपनाकर गंभीर जटिलताओं, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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