Silver Price Crash: चांदी में ऐतिहासिक गिरावट, खुलते ही 24 हजार रुपये टूटी, सोना भी धड़ाम
लंबे समय से लगातार रिकॉर्ड बना रहे सोना और चांदी के दामों में आखिरकार बड़ी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को बाजार खुलते ही कीमती धातुओं में ऐसी बिकवाली दिखी कि निवेशक भी चौंक गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 24 हजार रुपये प्रति किलोग्राम टूट गया, जबकि सोने की कीमत भी लगभग 8 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गई। तेज रफ्तार से ऊपर जा रही इन धातुओं में आई यह गिरावट हाल के महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी जा रही है।
चांदी की कीमत में अचानक क्रैश
सबसे पहले बात करें चांदी की, जिसने गुरुवार को इतिहास रच दिया था। बीते कारोबारी दिन एमसीएक्स पर चांदी की कीमत रॉकेट की तरह भागी और पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। गुरुवार को चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलो का लाइफ टाइम हाई बनाया था। हालांकि, कारोबार के अंत में यह कुछ फिसलकर 3,99,893 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
लेकिन शुक्रवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव खुलते ही 23,993 रुपये की भारी गिरावट के साथ 3,75,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। यानी एक ही दिन में चांदी निवेशकों को हजारों रुपये का झटका लगा। अगर लाइफ टाइम हाई से तुलना करें तो चांदी की कीमत एक दिन में करीब 44,148 रुपये तक टूट चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ी गिरावट है।
सोना भी नहीं बच पाया गिरावट से
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को सोना भी जबरदस्त तेजी के साथ दौड़ रहा था और इसने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का नया लाइफ टाइम हाई छू लिया था। कारोबारी दिन के अंत में सोना 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
शुक्रवार को जैसे ही 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट खुला, सोने की कीमत में तेज गिरावट देखने को मिली। सोना सीधे 8,862 रुपये सस्ता होकर 1,75,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यानी अपने हाई लेवल से देखें तो सोना एक ही दिन में करीब 17,996 रुपये तक टूट गया है। इतनी बड़ी गिरावट ने उन निवेशकों को झटका दिया है, जिन्होंने हाल ही में ऊंचे दामों पर सोने में निवेश किया था।
तेजी के बाद मुनाफावसूली बनी बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी में आई इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली है। बीते कुछ हफ्तों में दोनों कीमती धातुओं ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए थे। चांदी जहां 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गई, वहीं सोना भी 1.9 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया था। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा काटना शुरू किया, जिससे बाजार में अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब कीमतें बहुत तेजी से ऊपर जाती हैं, तो उसके बाद करेक्शन आना स्वाभाविक होता है। यही वजह है कि शुक्रवार को खुलते ही सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल संकेतों का भी असर
सोना-चांदी की कीमतों पर सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों का भी बड़ा असर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने बाजार की धारणा बदली है। टैरिफ अटैक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत के संकेत दिए हैं। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति थोड़ी बढ़ी है और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना-चांदी से कुछ निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू कर दिया। इसका सीधा असर एमसीएक्स समेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों पर देखने को मिला।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। लंबे समय से ऊंचे स्तर पर चल रहे सोना-चांदी में करेक्शन बाजार के लिए जरूरी माना जाता है। जिन निवेशकों को ऊंचे दामों के कारण खरीदारी का मौका नहीं मिल पा रहा था, उनके लिए यह गिरावट अवसर बन सकती है। हालांकि, जानकारों की सलाह है कि निवेश करते समय जल्दबाजी न करें। बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक संकेत, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक हालात पर आगे भी सोना-चांदी की दिशा निर्भर करेगी।
आगे क्या रह सकता है रुख?
अगर मुनाफावसूली का दबाव कुछ समय और बना रहता है, तो सोना-चांदी में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, अगर वैश्विक तनाव दोबारा बढ़ता है या डॉलर कमजोर होता है, तो इन कीमती धातुओं में फिर से तेजी लौट सकती है। फिलहाल इतना तय है कि शुक्रवार को आई इस बड़ी गिरावट ने बाजार की दिशा बदल दी है। रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलकर सोना और चांदी दोनों अब नए संतुलन की तलाश में नजर आ रहे हैं। निवेशकों की नजर अब आने वाले दिनों के वैश्विक संकेतों और बाजार की चाल पर टिकी हुई है।