सिद्धारमैया के करीबी केएन राजन्ना की मंत्री पद से छुट्टी, राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान पर बयान बना कारण
कर्नाटक के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना को कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मंत्रिपद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि उनका यह कदम राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान के खिलाफ उठाए गए बयान के कारण पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरा। राजन्ना ने खुलकर कहा था कि जब मतदाता सूची में गड़बड़ी हो रही थी, तब कांग्रेस ने चुप्पी क्यों साधी रही, जिससे पार्टी नेतृत्व खासा असंतुष्ट था।
केएन राजन्ना और कांग्रेस के बीच तनाव
कर्नाटक की राजनीति में 74 वर्षीय केएन राजन्ना एक जाना माना नाम हैं, जो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खास माने जाते हैं। मधुगिरी से विधायक राजन्ना कर्नाटक के प्रमुख अनुसूचित जनजाति नेताओं में गिने जाते हैं। उनके खुले बयानों ने कई बार सुर्खियाँ बटोरी हैं, लेकिन इस बार उनका राहुल गांधी के चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट मामले पर आलोचनात्मक रुख पार्टी नेतृत्व को पसंद नहीं आया।
राजन्ना ने यह सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सरकार थी तब वोटर लिस्ट बनाने और लोकसभा चुनाव कराने में क्या कमी थी, जो अब अचानक इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई जा रही है। उन्होंने कहा, “हमें शर्म आनी चाहिए कि यह सब हमारी आंखों के सामने हुआ, लेकिन हम चुप रहे।” उन्होंने हालांकि भविष्य में राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी के सही कदम उठाने की उम्मीद भी जताई।
सिद्धारमैया की कोशिशें नाकाम, तुरंत हटाया गया राजन्ना
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निर्देश दिया कि केएन राजन्ना को मंत्री पद से हटाया जाए। मुख्यमंत्री ने राजन्ना के पक्ष में पैरवी की और इसे विधानसभा सत्र के बाद करने का सुझाव दिया, लेकिन नेतृत्व ने इसे स्वीकार नहीं किया और तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया। राजन्ना को हटाए जाने के बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दखल और मजबूत हुआ है। राजन्ना का कहना था कि सिद्धारमैया ही उनके नेता हैं और उन्होंने कई बार शिवकुमार को भी इशारों में यह बात कही थी।
केएन राजन्ना का राजनीतिक सफर
74 वर्ष के केएन राजन्ना 2023 में दूसरी बार सिद्धारमैया सरकार में सहकारिता मंत्री बने थे। मधुगिरी विधानसभा क्षेत्र से वे कई बार निर्वाचित हुए हैं। राजन्ना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है, वे पूर्व में NAFED के निदेशक और कर्नाटक स्टेट को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष रह चुके हैं।
राजन्ना ने 1998 में विधान परिषद सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। 2004 में जब उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और जनता दल सेक्युलर में शामिल हो गए। जेडीएस के टिकट पर उन्होंने बेलागावी सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2013 में उन्होंने कांग्रेस में वापसी की और मधुगिरी से विधायक बने। 2023 में भी वे विजयी रहे। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)




