श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 : भक्तिमय उल्लास के बीच आज मनाया जा रहा है कान्हा का जन्मोत्सव
देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी कारण हर वर्ष इस दिन मध्यरात्रि में कान्हा का जन्मोत्सव विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
मध्यरात्रि में होगा लड्डू गोपाल का जन्म
45 मिनट का विशेष पूजन मुहूर्त
बन रहे हैं सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग
शुभ तिथि और विशेष योग
इस वर्ष अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:48 बजे से ही शुरू हो गई थी। जो आज 16 अगस्त की रात 9:34 बजे तक रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार उदया तिथि के आधार पर जन्माष्टमी आज शनिवार 16 अगस्त को मनाई जा रही है। बताया जाता है कि दें इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे आपको श्री कृष्ण का आशीर्वाद मिलेगा।
पूजन का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा और जन्मोत्सव के लिए विशेष मुहूर्त 16 अगस्त की रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक है। यानी भक्तों को कुल 45 मिनट का समय मिलेगा जिसमें भगवान का जन्मोत्सव संपन्न किया जाएगा।
प्रतिमा और श्रृंगार विधि
इस दिन प्रायः बाल कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना अनुसार राधा-कृष्ण या बंसीधारी स्वरूप भी चुन सकते हैं। श्रृंगार में फूलों का विशेष महत्व है। लड्डू गोपाल को पीत वस्त्र पहनाकर गोपी चंदन का तिलक लगाया जाता है। कृष्ण पर वैजयंती पुष्प चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्रत और नियम
जन्माष्टमी व्रत सामान्यतः निर्जला उपवास के रूप में रखा जाता है। भक्त दिनभर जल या फलाहार पर रहते हैं और मध्यरात्रि में भगवान का जन्मोत्सव कर पंचामृत स्नान कराते हैं। इस दिन काले और सफेद वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए।
अष्टमी तिथि और विशेष योग
ज्योतिष गणना के अनुसार अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:48 बजे प्रारंभ हुई और 16 अगस्त की रात 9:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को मानकर जन्माष्टमी का पर्व आज मनाया जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि ये योग भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहेंगे।
पूजा का शुभ मुहूर्त
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव परंपरागत रूप से मध्यरात्रि में संपन्न होता है। इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त 16 अगस्त को रात 12:04 से 12:47 बजे तक रहेगा। यानी केवल 45 मिनट की अवधि में भक्तों को कान्हा का जन्मोत्सव संपन्न करना होगा। इसी दौरान लड्डू गोपाल का जन्म कराकर पंचामृत स्नान और विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
प्रतिमा का चयन कैसे करें?
जन्माष्टमी पर सामान्यतः बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित की जाती है। किंतु श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के अनुसार भी स्वरूप चुन सकते हैं—
राधा-कृष्ण की मूर्ति प्रेम और दांपत्य सुख के लिए।
बाल कृष्ण का स्वरूप संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए।
बंसीधारी कृष्ण की प्रतिमा समग्र मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए।
श्रीकृष्ण का श्रृंगार
कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान का श्रृंगार विशेष महत्व रखता है। भक्त बाल गोपाल को पीले वस्त्र पहनाते हैं और उनके माथे पर गोपी चंदन का तिलक लगाते हैं। वैजयंती के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस अवसर पर कृष्ण को फूलों, मोरपंख और गहनों से सजाया जाता है। श्रृंगार के बाद उन्हें आईना दिखाकर दर्शन कराना परंपरा मानी जाती है।
श्रीकृष्ण का प्रसाद
पूजन के दौरान पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से भगवान का अभिषेक किया जाता है। इसमें तुलसी का पत्ता डालना अनिवार्य माना जाता है। इसके अतिरिक्त माखन-मिश्री, मेवे और धनिये की पंजीरी भी भोग में अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पंचामृत और माखन का भोग श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है।
जन्माष्टमी व्रत के नियम
भक्त जन्माष्टमी पर सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। यह व्रत प्रायः निर्जला उपवास के रूप में रखा जाता है, हालांकि कई लोग फलाहार भी ग्रहण करते हैं। व्रतधारी को सात्विक आचरण का पालन करना चाहिए। मध्यरात्रि में खीरे से बाल गोपाल का जन्म कराया जाता है और फिर प्रतिमा का पंचामृत स्नान कराकर श्रृंगार व पूजन संपन्न किया जाता है।
व्रत के दौरान ध्यान रखें—
काले और सफेद वस्त्र धारण न करें।
प्रसाद और अर्पण की सामग्री शंख में रखकर ही भगवान को अर्पित करें।
उपवास के दौरान क्रोध, असत्य और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
मंत्र और स्तुतियां
कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्ति मंत्रों और स्तुतियों का जाप विशेष फलदायी होता है।
“हरे कृष्ण” महामंत्र का जप जीवन में आनंद और शांति लाता है।
“मधुराष्टक” का पाठ प्रेम और भक्ति को बढ़ाता है।
श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ गुरु स्वरूप कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
“गोपाल सहस्त्रनाम” का पाठ सभी कामनाओं की पूर्ति हेतु श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रसाद और भोग
श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) का अर्पण अनिवार्य माना गया है। इसके साथ ही माखन, मिश्री, मेवा और धनिये की पंजीरी का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
मंत्र और पाठ
भक्त इस दिन “हरे कृष्ण महा मंत्र”, मधुराष्टक, गोपाल सहस्त्रनाम और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर भगवान को प्रसन्न करते हैं।
आध्यात्मिक महत्व
जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष में धर्म की विजय का प्रतीक भी है। श्रीकृष्ण का जीवन और उनका उपदेश गीता में मानवता को धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उत्सव की झलकियां
देशभर में मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई है। कई स्थानों पर झांकियां सजाई जा रही हैं जिनमें कृष्ण-लीलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। बच्चे बाल गोपाल का रूप धरकर उत्सव में शामिल हो रहे हैं। वृंदावन और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालु उमड़े हुए हैं। रात्रिकालीन घंटा बजते ही मंदिरों में “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजने लगेंगे। ष्ण जन्माष्टमी 2025 भक्तिभाव, व्रत, उपवास और अनुष्ठानों से मनाई जा रही है। इस बार भक्तों को मात्र 45 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा, जिसमें वे अपने प्रिय बाल गोपाल का जन्मोत्सव संपन्न करेंगे। श्रीकृष्ण के प्रति यह श्रद्धा ही इस पर्व को विशेष और आध्यात्मिक बनाती है।…( प्रकाश कुमार पांडेय)