चौंकाने वाले हैं समुद्री चुनौतियों ​से निपटने के तरीके

भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात का पहला समुद्री युद्धाभ्यास

हाल ही में भारत,फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात का पहला त्रिपक्षीय समुद्री युद्धाभ्यास ओमान की खाड़ी में संपन्न हुआ है। यहां सेना ने समुद्री चुनौतियों से निपटने के जिन तरीकों पर अभ्यास किया है वो वास्तव में हैरान करने वाले हैं। नौसेना ने बताया कि बीते अभ्यास संपन्न हुआ। जिसमें समुद्र में कई तरह के समुद्री अभियान पूरे किए गए। सरफेस वॉरफेयर, सतह के लक्ष्यों पर मिसाइल, रणनीतिक गोलीबारी अभ्यास, मिसाइल से जुड़े अभियान, उन्नत वायु रक्षा अभ्यास और हेलिकॉप्टर क्रास लैंडिंग ऑपरेशन को अभ्यास के दौरान परखा गया। अभ्यास में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए कर्मियों का क्रास इम्बार्कमेंट भी शामिल किया गया। युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना का तरकश युद्धपोत, फ्रांसीसी जहाज सरकॉफ, राफेल, दोनों देशों के हेलिकॉप्टर, यूएई के डेस 8 एमपीए समुद्री गश्ती विमान ने भाग लिया।

सहयोग बढ़ाना था उद्देश्य

तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच हुए इस पहले समुद्री युद्धाभ्यास का उद्देश्य त्रिपक्षीय सहयोग बढ़ाना, समुद्री वातावरण में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों को दूर करने के उपायों को अपनाने का मार्ग प्रशस्त करना है। यह युद्धाभ्यास व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में उच्च समुद्रों पर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग को भी बढ़ाएगा।अभ्यास में आईएनएस तरकश और फ्रांसीसी जहाज सरकौफ, इंटीग्रल हेलीकॉप्टर, फ्रांस का राफेल विमान और संयुक्त अरब अमीरात के नौसेना समुद्री गश्ती विमान भाग लिया हैं।

विपरीत चुनौतियों से जूझने के बताए तरीके

दो दिनों के लिए निर्धारित अभ्यास में नौसेना के संचालन का एक विस्तृत समूह को देखा जाएगा जैसे कि भूतल युद्ध, सतह के लक्ष्यों पर मिसाइल से सामरिक गोलीबारी और अभ्यास, हेलीकाप्टर क्रॉस डेक लैंडिंग संचालन, उन्नत वायु रक्षा अभ्यास और बोर्डिंग संचालन शामिल हैं। इस अभ्यास में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए कर्मियों का आपसी आरोहण भी शामिल होगा।तीनों देशों के बीच पहले अभ्यास का उद्देश्य तीनों नौसेनाओं के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ाना और समुद्री वातावरण में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों को दूर करने के उपायों को अपनाने का मार्ग प्रशस्त करना है। यह अभ्यास वाणिज्यिक व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में गहरे समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग को भी बढ़ाएगा।

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