उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: 9 सितंबर को होगा मतदान…शशि थरूर बोले—‘NDA का ही होगा अगला उपराष्ट्रपति…जानें कांग्रेस को क्यों लगी मिर्च
शशि थरूर की बेबाक टिप्पणी से कांग्रेस में हलचल! बोले- बहुमत एनडीए के पास, नतीजा तय
भारत में उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर तारीख का एलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने बताया है कि अगले माह 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान कराया जायेगा। बता दें जगदीप धनखड़ के हालिया इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त हो गया है और चुनाव आवश्यक हो गया है। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का बयान सामने आया है, जिसने देश की सियासी फिजा में हलचल मचा दी है।
शशि थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि अगला उपराष्ट्रपति सत्तारूढ़ एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से ही होगा क्योंकि संसद में उसका स्पष्ट बहुमत है। इस बयान से विपक्षी खेमे खासकर कांग्रेस के भीतर खलबली मचना स्वाभाविक है, क्योंकि थरूर ने विपक्ष की संभावित हार को खुले तौर पर स्वीकार कर लिया है।
क्या बोले शशि थरूर?
एक मीडिया संवाद के दौरान जब थरूर से पूछा गया कि देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन हो सकता है, तो उन्होंने कहा “कोई अंदाजा नहीं है कि व्यक्ति कौन होगा, लेकिन यह तय है कि वह सत्तारूढ़ दल द्वारा नामित होगा। चूंकि इस चुनाव में केवल सांसद वोट डालते हैं, और संसद में बहुमत एनडीए के पास है, इसलिए नतीजा पहले से ही तय जैसा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपराष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधानसभाएं भाग नहीं लेतीं, अतः वोटिंग पूरी तरह से लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों द्वारा की जाती है। थरूर के इस बयान को कांग्रेस के भीतर के एक “सच को स्वीकार करने” के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी लाइन से हटकर बयान मान रहे हैं।
कांग्रेस में पड़ सकती है खलबली
शशि थरूर का बयान कांग्रेस के लिए असहज करने वाला हो सकता है। जहां एक ओर पार्टी पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन और विपक्षी एकजुटता की बातें कर रही है, वहीं थरूर का यह बयान एक तरह से यह स्वीकार कर रहा है कि संसद के भीतर विपक्ष अभी भी कमजोर है और एनडीए की पकड़ मजबूत है। यह भी गौरतलब है कि थरूर पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर अपने स्वतंत्र विचारों के लिए जाने जाते हैं। चाहे अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना हो या फिर विदेश नीति पर भिन्न दृष्टिकोण, थरूर कई बार कांग्रेस नेतृत्व से अलग राय रखते आए हैं। उनके इस बयान को भी इसी रुझान के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव की प्रक्रिया और तारीखें
भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव एक अप्रत्यक्ष निर्वाचन होता है, जिसमें केवल संसद के सदस्य (लोकसभा और राज्यसभा) ही वोट डालते हैं। राज्य विधानसभा या आम जनता का इसमें कोई दखल नहीं होता।
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित शेड्यूल के अनुसार
अधिसूचना जारी होने की तिथि: 7 अगस्त 2025
नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025
नामांकन की जांच: 22 अगस्त 2025
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 24 अगस्त 2025
मतदान की तिथि: 9 सितंबर 2025
मतगणना और परिणाम: मतदान के दिन यानी 9 सितंबर को ही
एनडीए का प्रत्याशी कौन?
हालांकि अभी तक एनडीए या विपक्षी गठबंधन इंडिया (I.N.D.I.A) की ओर से किसी उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार एनडीए इस बार एक अनुभवी, सर्वमान्य और गैर-विवादित चेहरे को आगे लाने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष की ओर से भी कुछ नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन एकमत बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
उपराष्ट्रपति की भूमिका
भारत के उपराष्ट्रपति न केवल देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी होते हैं, बल्कि राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। ऐसे में संसद के उच्च सदन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसदीय गरिमा, अनुशासन और संतुलन बनाए रखने में उनकी निर्णायक भूमिका होती है। शशि थरूर का बयान चाहे जैसे भी लिया जाए, लेकिन यह साफ है कि उपराष्ट्रपति पद का यह चुनाव एकतरफा होता नजर आ रहा है। जब तक संसद में संख्याबल नहीं बदलता, तब तक इस प्रकार के चुनाव में विपक्ष की राह आसान नहीं होगी। अब देखना यह है कि एनडीए किस नाम को सामने लाता है और विपक्ष उसके मुकाबले किसे खड़ा करता है। राजनीति की इस शतरंज में अगली चाल अब सत्तारूढ़ गठबंधन के हाथ में है।…( प्रकाश कुमार पांडेय)





