पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। निवेशकों ने शुरुआती घंटों में खरीदारी दिखाई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल भी बना हुआ है।
घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार में दिखी मजबूती
सप्ताह के मध्य कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में 400 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 74,356 का स्तर छू लिया। वहीं एनएसई निफ्टी भी करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ 23,351 के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी शुरू की है, जिससे बाजार को सहारा मिला।
एफएमसीजी और ऑयल सेक्टर बने बाजार की तेजी के प्रमुख आधार
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो उपभोक्ता उत्पाद (FMCG) कंपनियों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा केमिकल, ऑयल एंड गैस और निजी बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों का रुझान मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कमाई वाली कंपनियों की ओर ज्यादा दिखाई दिया।
मेटल शेयरों में दबाव जारी, कुछ दिग्गज कंपनियां फिसलीं
जहां एक ओर बाजार के कई सेक्टरों में तेजी रही, वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी मेटल इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक कमजोर रहा। हिंदाल्को इंडस्ट्रीज सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रही। इसके अलावा कुछ अन्य बड़े शेयरों में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे बाजार की तेजी सीमित रही।
तकनीकी संकेत बता रहे बाजार के अगले बड़े मूव की दिशा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों की बिकवाली के बाद अब बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 23,500 से 23,600 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस बना हुआ है। किसी भी दिशा में निर्णायक ब्रेकआउट आने वाले दिनों की चाल तय कर सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल पर निवेशकों की नजर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास और WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के प्रमुख बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी पिछला कारोबारी सत्र गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेशकों का मूड सतर्क बना हुआ है।





