भारतीय शेयर बाजार में 2 जून 2026 को भी कमजोरी का माहौल बना रहा। घरेलू और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर बाजार की शुरुआत से ही दिखाई दिया। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज होने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी ने कमजोर शुरुआत के साथ बढ़ाई निवेशकों की चिंता
मंगलवार को बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखाई दिया। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 74 हजार के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया और शुरुआती कारोबार में करीब 322 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं एनएसई का निफ्टी भी 153 अंक फिसलकर 23,229 के आसपास पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 508 अंक टूटकर 74,267 और निफ्टी 165 अंक गिरकर 23,382 पर बंद हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका से जुड़े हालात ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से बाजार में महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाना पसंद कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बनी बड़ी चुनौती
बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी है। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है। एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये की बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।
बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी शेयरों में रही सबसे ज्यादा कमजोरी
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
विशेषज्ञों की सलाह, जल्दबाजी के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।





