भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली। सोमवार की भारी बिकवाली के बाद निफ्टी 50 और BSE सेंसेक्स मंगलवार को भी 0.8 फीसदी से ज्यादा नीचे आ गए। पिछले चार कारोबारी दिनों में बाजार की लगातार कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है और इस दौरान करीब ₹14 लाख करोड़ की बाजार पूंजी घट गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड का ऊपर जाना और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाल रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने से बचते हुए ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं।
23 सितंबर से लगातार कमजोर रहा बाजार, चार दिनों में सेंसेक्स के स्तर में आया बड़ा बदलाव
बाजार में गिरावट का सिलसिला 23 सितंबर से दिखाई दिया। 23 सितंबर को सेंसेक्स 74,828 के स्तर पर बंद हुआ था। इसके अगले कारोबारी दिन यानी 24 सितंबर को बिकवाली और बढ़ गई और सेंसेक्स करीब 1,247 अंक टूटकर 73,580 पर बंद हुआ। हालांकि 25 सितंबर को बाजार में कुछ सुधार आया और सेंसेक्स 315 अंक की बढ़त के साथ 73,895 के स्तर पर पहुंचा। इसके बाद 28 सितंबर को फिर जोरदार बिकवाली हुई और सेंसेक्स 1,124 अंक गिर गया।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार से पैसा निकलकर सुरक्षित निवेश की ओर जा रहा है
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी के पार पहुंच गई है, जिसे 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया है। जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है तो निवेशकों के लिए इक्विटी की तुलना में बॉन्ड जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर शेयर बाजार में बिकवाली के रूप में दिखाई दे सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई
दूसरा बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर बाजार के निवेशकों के रुख पर भी पड़ सकता है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से बाजार में बनी हुई है सतर्कता
तीसरी चिंता वैश्विक ब्याज दरों को लेकर है। अमेरिका में दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद बाजार आगे भी 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की संभावना पर नजर रख रहा है। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो कंपनियों की फंडिंग लागत और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक तेजी के दौरान मुनाफावसूली कर सकते हैं, जिससे बाजार में ‘सेल ऑन राइज’ जैसी स्थिति बन सकती है।