Share Market: शेयर बाजार फिर धड़ाम! सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, FII बिकवाली से बढ़ी चिंता; जानें अब निवेशकों को क्या करना चाहिए

भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर की शुरुआत भी दबाव के साथ हुई है। 1 अक्टूबर को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर रहे। सुबह के कारोबार में निफ्टी 22,600 के नीचे चला गया, जबकि सेंसेक्स भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। सितंबर में निफ्टी करीब 6.1% गिर चुका है और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

शेयर बाजार एक बार फिर क्यों धड़ाम हुआ?

बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये पर दबाव और वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया है। इसके अलावा ऑटो शेयरों में तेज गिरावट ने भी प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

क्या कच्चा तेल और ग्लोबल तनाव भी है बड़ी वजह?

कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि 1 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास नरम हुआ, लेकिन ऊंची कीमतें अब भी बाजार की चिंता बनी हुई हैं।

क्या विदेशी निवेशक बाजार में बिकवाली बढ़ा रहे हैं?

हां, FII की बिकवाली मौजूदा गिरावट का प्रमुख कारण बनी हुई है। 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹10,148 करोड़ निकाले और यह लगातार पांचवां बिकवाली वाला सत्र था। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की निकासी करीब $3.6 अरब तक पहुंच गई। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे रही है।

आम निवेशक पर क्या असर और एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

बाजार गिरने पर शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के पोर्टफोलियो की वैल्यू घट सकती है। हालांकि नुकसान वास्तविक तब होता है जब निवेशक कम कीमत पर अपनी होल्डिंग बेच देता है। मौजूदा हालात में विशेषज्ञों ने बाजार में सावधानी बरतने पर जोर दिया है। तकनीकी विश्लेषण में निफ्टी के लिए 22,500 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 22,800-23,000 का क्षेत्र ऊपर की तरफ अहम बाधा बताया गया है।

क्या अभी निवेश करना सही समय है?

यह सवाल हर निवेशक की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो पर निर्भर करता है। कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट के बाद मजबूत कंपनियों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में आकर्षक हुए हैं, जबकि तकनीकी संकेत अभी सावधानी की ओर इशारा कर रहे हैं। इसलिए एकमुश्त निवेश का फैसला लेने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। निवेश से पहले SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित रहेगा।

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