घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार आठवें सप्ताह भी जारी रहा है। भारतीय इक्विटी बाजार के लिए यह दौर पिछले करीब 25 वर्षों में सबसे लंबी साप्ताहिक कमजोरी वाला समय बन गया है। गुरुवार के कारोबार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, मजबूत डॉलर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,200 अंक तक टूट गया और निफ्टी भी 22,300 के नीचे चला गया। हालांकि, कारोबार खत्म होने तक बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से दुनिया भर के बाजारों में बढ़ी हलचल और निवेशकों की चिंता
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने दुनियाभर के वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया। यह यील्ड ग्लोबल एसेट्स की कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.3% तक पहुंच गई, जो अप्रैल 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। वहीं, 30 साल की यील्ड भी 5.6% तक पहुंच गई। बढ़ती यील्ड के बीच निवेशकों का रुझान डॉलर आधारित सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ा।
सेंसेक्स 570 अंक गिरा, निफ्टी में भी करीब 200 अंकों की बड़ी कमजोरी दर्ज हुई
गुरुवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 1,200 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79% की कमजोरी के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 50 में 199 अंक यानी 0.9% की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,422 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में लगातार जारी कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
आठ सप्ताह की लगातार गिरावट ने कोविड काल के सात सप्ताह वाले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा
शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट का सिलसिला 10 अगस्त से शुरू हुआ था। अब यह लगातार आठवें सप्ताह तक पहुंच गया है। इस दौरान बाजार में करीब 9% की गिरावट दर्ज हुई है। यह गिरावट कोविड लॉकडाउन के शुरुआती दौर में आई लगातार सात सप्ताह की कमजोरी से भी लंबी हो गई है। इससे पहले 2001 में 12 फरवरी से 12 अप्रैल के बीच शेयर बाजार लगातार नौ सप्ताह तक गिरा था।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कमजोर रुपये ने बाजार पर बनाया दोहरा दबाव
सितंबर में विदेशी फंड्स ने भारतीय शेयर बाजार से 44,013 करोड़ रुपये की निकासी की। अगस्त में भी विदेशी निवेशकों ने 7,532 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। डॉलर मजबूत होने के कारण गुरुवार को भारतीय रुपया करीब आधा प्रतिशत कमजोर हुआ और एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा। इंडोनेशियाई रुपिया, थाई बाट और जापानी येन में भी 0.35% से 0.45% तक गिरावट आई।
कच्चा तेल, बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल लिक्विडिटी बने बाजार के लिए बड़े जोखिम
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, ग्लोबल बॉन्ड में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी बिकवाली से निकट अवधि में भारतीय इक्विटी पर दबाव बना रह सकता है। इक्विरस वेल्थ के अंकुर पुंज ने भी महंगे कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी को चिंता का कारण बताया। हालांकि, लगातार गिरावट के बीच कुछ शेयरों में मूल्यांकन और पोजिशनिंग में बदलाव के कारण निवेश के अवसर भी बन सकते हैं।