शरद पवार परिवार में शादी की शहनाई, राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं.. बीजेपी के इस नेता के घर की बहू बनेगी शरद पवार की नातिन
रेवती सुले और सारंग लखानी का विवाह बना चर्चा का विषय, एनसीपी-बीजेपी रिश्तों पर उठे सवाल
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक शादी चर्चा के केंद्र में है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक Sharad Pawar की नातिन रेवती सुले और भाजपा नेता Arun Lakhani के बेटे सारंग लखानी 20 जून को विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। यह रिश्ता दो प्रतिष्ठित परिवारों को जोड़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को भी जन्म दे रहा है।
लखानी परिवार लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Janata Party से जुड़ा रहा है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस विवाह को केवल पारिवारिक संबंध नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले परिवारों के बीच रिश्ते के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इसे पूरी तरह पारिवारिक आयोजन बताया जा रहा है।
इस रिश्ते को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा तब शुरू हुई जब भाजपा ने विधान परिषद चुनाव के लिए अरुण लखानी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद विपक्षी दलों, विशेषकर Sanjay Raut ने इस रिश्ते और राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने कई मौकों पर दोनों परिवारों की बढ़ती नजदीकियों पर कटाक्ष भी किया।
कौन हैं अरुण लखानी?
अरुण लखानी महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मलकापुर से आते हैं और पेशे से इंजीनियर हैं। उनका परिवार लंबे समय से संघ विचारधारा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी संघ की गतिविधियों से जुड़े रहे थे, जबकि उनके बड़े भाई वर्तमान में मलकापुर के संघचालक हैं।
अरुण लखानी वर्ष 1999 से भाजपा से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में भाजपा महाराष्ट्र इकाई के संयुक्त कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राजनीति के अलावा उन्होंने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे महाराष्ट्र बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष, भारतीय बैडमिंटन संघ के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर पर कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं।
क्या राजनीतिक नजदीकियां बढ़ेंगी?
रेवती सुले और सारंग लखानी की शादी को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर अरुण लखानी ने स्पष्ट किया है कि पारिवारिक रिश्तों और राजनीतिक विचारधाराओं को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि दोनों परिवारों के बीच रिश्तेदारी होने का अर्थ यह नहीं है कि राजनीतिक दलों की विचारधाराएं बदल जाएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि Supriya Sule ने उन्हें भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने पर शुभकामनाएं भेजी थीं, जो पारिवारिक रिश्तों का हिस्सा है। लखानी के अनुसार राजनीति और निजी संबंधों को अलग रखना चाहिए और दोनों परिवार अपनी-अपनी विचारधाराओं के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
गडकरी और फडणवीस की भूमिका चर्चा में
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस रिश्ते को अंतिम रूप देने में केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों नेताओं के पवार और लखानी परिवारों से लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध रहे हैं।
राजनीति और रिश्तों का अलग समीकरण
महाराष्ट्र की राजनीति में पारिवारिक और सामाजिक संबंधों का इतिहास काफी पुराना रहा है। कई बार अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के बीच रिश्तेदारी देखने को मिली है, लेकिन इससे राजनीतिक गठबंधन या वैचारिक बदलाव जरूरी नहीं हो जाते।
फिलहाल रेवती सुले और सारंग लखानी की शादी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन एनसीपी और भाजपा के बीच किसी नई राजनीतिक नजदीकी के संकेत अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं। दोनों परिवार इस रिश्ते को निजी और पारिवारिक अवसर बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अटकलों का दौर जारी है।





