शम्मी कपूर मुट्ठी भर-भरकर बांटते थे नोट, कैश से भरी बोरी साथ लेकर चलता था
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ सितारे सिर्फ अपनी फिल्मों से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व से भी याद किए जाते हैं। ऐसे ही थे ‘याहू’ स्टार शम्मी कपूर, जिनकी ऊर्जा, शाही अंदाज़ और दरियादिली के किस्से आज भी इंडस्ट्री में सुनाए जाते हैं। हाल ही में निर्देशक राहुल रवैल ने एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने शम्मी कपूर की शख्सियत का एक और रंग सामने ला दिया। राहुल रवैल ने बताया कि शम्मी कपूर जब भी कश्मीर में शूटिंग के लिए जाते थे, तो वहां के लोगों के लिए किसी त्योहार से कम माहौल नहीं होता था। स्थानीय लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ते थे, और शम्मी कपूर भी अपने खास अंदाज़ में उनका प्यार लौटाते थे—मुट्ठी भर-भरकर नोट बांटकर।
जिंदादिली उनकी पहचान
स्टारडम और शख्सियत
मुट्ठी भर-भरकर बांटते थे नोट
कैश से भरी बोरी साथ लेकर चलते थे
कश्मीर से खास रिश्ता
शम्मी कपूर का कश्मीर से गहरा जुड़ाव रहा। उनकी सुपरहिट फिल्म कश्मीर की कली की शूटिंग वहीं हुई थी। इस फिल्म की कामयाबी के बाद कश्मीर की वादियों और शम्मी कपूर का रिश्ता और मजबूत हो गया। डल झील, बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ट्यूलिप गार्डन—इन सबके बीच शम्मी कपूर का अंदाज़ दर्शकों के दिलों में बस गया। कश्मीर के लोग उन्हें सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानने लगे थे। राहुल रवैल के मुताबिक, “स्थानीय लोग शम्मी जी को वहां देखने के आदी हो चुके थे। जब भी वह श्रीनगर पहुंचते, माहौल अलग ही हो जाता था।
‘बेताब’ की शूटिंग और शाही अंदाज़
राहुल रवैल ने दैनिक जागरण से बातचीत में अपनी फिल्म बेताब की शूटिंग का जिक्र किया। इस फिल्म में सनी देओल और अमृता सिंह मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग कश्मीर में हुई थी। राहुल ने बताया कि शम्मी कपूर हमेशा श्रीनगर के ओबेरॉय लेक पैलेस होटल में ठहरते थे। शूटिंग खत्म होने के बाद जब वह होटल से बाहर निकलते, तो स्टाफ के लोग उन्हें विदाई देने के लिए कॉरिडोर में खड़े हो जाते थे। यहीं पर शुरू होता था उनका ‘राजसी अंदाज़’। राहुल रवैल ने बताया, “शम्मी जी के साथ हमेशा दो लोग चलते थे, जो एक बोरी में कैश लेकर चलते थे। वह बोरी में हाथ डालते और जितने नोट उनकी मुट्ठी में आते, उतने ही होटल स्टाफ और वहां मौजूद लोगों में बांट देते थे।” यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं थी। राहुल के मुताबिक, शम्मी कपूर जहां भी शूटिंग के लिए जाते, उनका यही अंदाज़ रहता। वह दिल खोलकर खर्च करते और लोगों का दिल जीत लेते।
दरियादिली का दूसरा नाम
फिल्म इंडस्ट्री में शम्मी कपूर को उनके जिंदादिल स्वभाव के लिए जाना जाता था। वह अपने साथ काम करने वाले टेक्नीशियनों, जूनियर आर्टिस्ट और स्टाफ का खास ख्याल रखते थे। राहुल रवैल ने कहा कि यह उनका ‘राजसी स्वभाव’ था। वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक बड़े दिल वाले इंसान थे। उनके लिए पैसा सिर्फ साधन था, असली खुशी लोगों के चेहरों पर मुस्कान देखना था। कश्मीर में तो उनका प्यार और भी खास था। वहां के लोग उन्हें ‘अपना शम्मी साहब’ कहते थे। शायद यही वजह थी कि वह भी वहां के लोगों पर खुलकर स्नेह लुटाते थे।
आखिरी फिल्म और विदाई
शम्मी कपूर का निधन 14 अगस्त 2011 को हुआ। उनकी आखिरी फिल्म रॉकस्टार थी, जिसमें उनके साथ उनके पोते रणबीर कपूर नजर आए थे। बताया जाता है कि रणबीर के कहने पर ही उन्होंने इस फिल्म के लिए हामी भरी थी। निर्देशक इम्तियाज अली की इस फिल्म में शम्मी कपूर का छोटा लेकिन यादगार रोल था। यह उनके लंबे और शानदार करियर का भावनात्मक समापन भी बन गया।
यादों में जिंदा एक शाही कलाकार
आज जब राहुल रवैल जैसे फिल्मकार उनके किस्से सुनाते हैं, तो महसूस होता है कि शम्मी कपूर सिर्फ पर्दे के हीरो नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी किसी फिल्मी महाराजा से कम नहीं थे। कश्मीर की वादियों में गूंजता उनका ‘याहू’, होटल के कॉरिडोर में खड़े स्टाफ के चेहरों पर मुस्कान, और मुट्ठी भर नोट बांटता उनका हाथ—ये सब तस्वीरें आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। शम्मी कपूर ने अपने अभिनय से जितना नाम कमाया, उतना ही सम्मान अपने व्यवहार से भी पाया। उनकी दरियादिली और शाही अंदाज़ के किस्से आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाते रहेंगे कि सच्ची स्टारडम सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि दिलों में बसने से मिलती है।





