डीजे की तेज आवाज बनी मौत की वजह? क्लासरूम में छात्रा की तबीयत बिगड़ी, जांच में खुलेगा मौत का सच
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में स्कूल के क्लासरूम से सामने आई छात्रा की मौत की घटना ने तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिवाइन पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा की छात्रा सोमवार को क्लास में पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान स्कूल के बाहर से गणेश विसर्जन जुलूस गुजरा, जिसमें तेज आवाज में डीजे बजने की बात सामने आई है।
क्लास में अचानक मची अफरा-तफरी
परिजनों और स्कूल प्रबंधन के अनुसार जुलूस के दौरान डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि स्कूल की खिड़कियों के शीशों में कंपन महसूस हो रहा था। इसी दौरान छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ी। परिजनों का दावा है कि उसे एक के बाद एक तीन बार अटैक आया। शिक्षकों ने तत्काल बच्ची को संभाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना का करीब तीन मिनट का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में क्लासरूम के भीतर अचानक अफरा-तफरी दिखाई देती है। यह वीडियो अब पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या डीजे की आवाज से गई जान?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। परिजन तेज डीजे और उसके कंपन को बच्ची की मौत से जोड़ रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने भी जुलूस के दौरान तेज आवाज में डीजे बजने की बात कही है। लेकिन अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि छात्रा की मौत सीधे डीजे की आवाज के कारण हुई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, डीजे की आवाज कितनी थी और बच्ची की मौत की वास्तविक चिकित्सकीय वजह क्या थी, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
घटना ने खड़े किए बड़े सवाल
यह मामला सिर्फ एक बच्ची की मौत तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी सामने आता है कि स्कूल, अस्पताल और दूसरे संवेदनशील इलाकों के आसपास ध्वनि सीमा के नियमों का पालन कितना हो रहा है। उत्सव और धार्मिक आयोजनों में तेज ध्वनि के इस्तेमाल को लेकर नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन और प्रभावी निगरानी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल बच्ची की मौत का कारण मेडिकल जांच और पुलिस की पड़ताल से स्पष्ट होगा। डीजे और मौत के बीच सीधा संबंध जांच में साबित होता है या नहीं, यही इस मामले की सबसे अहम कड़ी है।





