झालावाड़ स्कूल हादसे पर भड़के सचिन पायलट: बोले- “यह आपराधिक लापरवाही है”, दोषियों के इस्तीफे की मांग

Seven students died due to collapse of Jhalawar school building

झालावाड़ स्कूल हादसे पर भड़के सचिन पायलट: बोले- “यह आपराधिक लापरवाही है”, दोषियों के इस्तीफे की मांग

राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की इमारत गिरने से सात मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाया और इसे ‘आपराधिक लापरवाही’ करार दिया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा इस दुर्घटना के लिए सीधे तौर पर राज्य की भजनलाल सरकार जिम्मेदार है। इस मामले से संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

सचिन पायलट ने कहा कि यह महज एक हादसा नहीं है, बल्कि एक बेहद दुखद और चिंताजनक प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने कहा, “सात बच्चों की मौत हो चुकी है और राज्य सरकार अब भी अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। हादसे के बाद भी किसी जिम्मेदार ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं दिया, न ही सरकार ने कोई ठोस एक्शन लिया।”

“पिछली सरकार को कोसना बंद करें, जिम्मेदारी लें”

सचिन पायलट ने शिक्षा मंत्री की ओर से दिए गए उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मंत्री ने हादसे के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। पायलट ने कहा, “आप दो साल से सरकार में हैं। आपके पास सत्ता है, बजट है, संसाधन हैं, फिर भी आप ये कह रहे हैं कि पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया। अगर कुछ नहीं किया गया था, तो अब तक आपने क्या किया?”

उन्होंने पूछा कि जब सरकार को पता था कि राज्य के कई स्कूल भवन पुराने और जर्जर हालत में हैं, तो समय रहते उनकी मरम्मत या नवीनीकरण क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार मानसून से पहले स्कूल भवनों का निरीक्षण नहीं कर सकती थी?

“स्कूल भवनों की हालत पर राज्यभर में ऑडिट हो”

सचिन पायलट ने राजस्थान सरकार से मांग की कि पूरे राज्य में स्कूल भवनों का तुरंत ऑडिट कराया जाए ताकि पता चल सके कि कहां-कहां पर इमारतें जर्जर स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के मौसम में ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है और समय रहते सतर्कता बरतनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा, “हम यह मांग करते हैं कि राज्य सरकार एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाए, जो पूरे प्रदेश में स्कूलों की हालत का जायजा ले और एक समयसीमा के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।”

“शिक्षा विभाग और PWD की भूमिका पर सवाल”

इस हादसे के बाद शिक्षा विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर इतने वर्षों से जर्जर स्थिति में मौजूद स्कूल भवन को लेकर कोई कार्य योजना क्यों नहीं बनी? क्या विभागीय अधिकारियों ने कभी उस स्कूल का निरीक्षण किया था?

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों और शिक्षकों ने कई बार इमारत की खराब हालत की शिकायत की थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। इससे यह बात साफ होती है कि सरकारी मशीनरी ने गंभीर लापरवाही बरती, जिसके चलते मासूम बच्चों की जान गई।

“विपक्ष का बढ़ा दबाव, सरकार की चुप्पी”

सचिन पायलट के इस बयान के बाद विपक्ष का सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जा रहा है। हालांकि, राजस्थान सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सचिन पायलट के तीखे बयान और सीधी कार्रवाई की मांग ने भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह मुद्दा विधानसभा सत्र से लेकर लोकसभा चुनाव तक गूंज सकता है।

“सवालों के घेरे में सरकारी स्कूलों की स्थिति”

झालावाड़ हादसे ने एक बार फिर राज्य में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को उजागर कर दिया है। कई स्कूल ऐसे हैं जो वर्षों से बिना मरम्मत के चल रहे हैं। बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा व्यवस्था को चलाना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है।

सचिन पायलट का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य में शिक्षा और संरचना को लेकर एक व्यापक बहस की शुरुआत भी करता है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है — क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य हादसों की तरह धुंधला पड़ जाएगा।

झालावाड़ का स्कूल हादसा एक त्रासदी से कहीं बढ़कर एक चेतावनी है। यह हादसा बताता है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था के ढांचे की हालत कैसी है। सचिन पायलट की मांगें और तीखी प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अब समय आ गया है जब सरकार को सतर्क होकर ठोस कदम उठाने चाहिए। वरना अगली त्रासदी किसी और स्कूल में, किसी और मासूम की जान लेकर सामने आ सकती है।…( प्रकाश कुमार पांडेय)

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