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UP में विकास को रफ्तार: मंत्रियों को 50 करोड़ तक योजनाओं की मंजूरी, लखनऊ के सात प्रवेश द्वार बनेंगे धर्म-शौर्य के प्रतीक

DigitalDesk by DigitalDesk
January 31, 2026
in उत्तर प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति, लखनऊ, शहर और राज्य, संपादक की पसंद
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seven entrances of Lucknow
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UP में विकास को रफ्तार

मंत्रियों को 50 करोड़ तक योजनाओं की मंजूरी

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लखनऊ के सात प्रवेश द्वार बनेंगे धर्म-शौर्य के प्रतीक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में विकास परियोजनाओं को तेज गति देने के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब विभागीय मंत्री 50 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को सीधे मंजूरी दे सकेंगे। पहले यह सीमा सिर्फ 10 करोड़ रुपये तक थी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से परियोजनाओं में देरी कम होगी और विकास कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे। सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव के तहत अब 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को वित्त मंत्री की स्वीकृति मिलेगी, जबकि 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से दी जाएगी। इससे निर्णय प्रक्रिया को स्पष्ट, पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की गई है।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्त विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत कराएं। उन्होंने कहा कि जो विभाग समयसीमा का पालन नहीं करेंगे, उनकी सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना की लागत यदि 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ती है, तो संबंधित विभाग को कारण बताते हुए दोबारा अनुमोदन लेना होगा। इसका उद्देश्य बजट अनुशासन बनाए रखना और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाना है।

बजट प्रबंधन और वित्तीय सुधारों पर जोर

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाए, जिससे निवेश और विकास योजनाओं को और मजबूती मिल सके।

परियोजनाओं की “ट्रेन” होगी सरपट

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से परियोजनाओं की मंजूरी में लगने वाला समय घटेगा और विकास कार्यों की “ट्रेन” सरपट दौड़ेगी। विभागीय स्तर पर ही निर्णय होने से फाइलों के अनावश्यक चक्कर कम होंगे और जनता को योजनाओं का लाभ जल्दी मिलेगा।

लखनऊ के सात प्रवेश द्वार: धर्म और शौर्य की झलक

वित्तीय सुधारों के साथ-साथ सरकार ने राजधानी लखनऊ को सांस्कृतिक पहचान देने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि लखनऊ के सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएं। ये द्वार धर्म, शौर्य और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में प्रवेश करते ही लोगों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के दर्शन होने चाहिए। इन प्रवेश द्वारों पर प्रदेश का राजकीय चिह्न भी अंकित होगा, जो राज्य की पहचान को और सशक्त करेगा।

किन मार्गों पर बनेंगे प्रवेश द्वार

सीएम के निर्देश के अनुसार, लखनऊ से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर ये प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इनकी डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता दी जाएगी।

डिजाइन में होगा भारतीयता का रंग

प्रवेश द्वारों को पत्थर की नक्काशी, भव्य स्तंभ, आकर्षक म्यूरल, फव्वारे, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के माध्यम से न केवल सुंदर बल्कि अर्थपूर्ण बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि ये द्वार केवल सजावटी न हों, बल्कि प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक चेतना को भी दर्शाएं।

इन द्वारों के निर्माण में कारपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। साथ ही यह तय किया गया है कि जिस विभाग की सड़क होगी, वही विभाग उस प्रवेश द्वार का निर्माण कराएगा।

प्रवेश द्वारों के नाम और स्वरूप

मुख्यमंत्री ने प्रवेश द्वारों के नामकरण और स्वरूप को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं—

  • प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड): संगम द्वार – त्रिवेणी संगम और महाकुंभ परंपरा का प्रतीक

  • वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड): नंदी द्वार – श्री काशी विश्वनाथ धाम की झलक

  • अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड): सूर्य द्वार – भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित

  • नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड): व्यास द्वार – ऋषि-मुनियों की तपोभूमि का प्रतीक

  • हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड): धर्म द्वार – धर्म और न्याय की परंपरा को दर्शाता

  • मथुरा मार्ग (आगरा रोड): कृष्ण द्वार – भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि का प्रतीक

  • झांसी मार्ग (उन्नाव रोड): शौर्य द्वार – वीरता और बलिदान की भावना को समर्पित

विकास और विरासत का संगम

सरकार का मानना है कि एक ओर जहां वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया में बदलाव से विकास योजनाओं को गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लखनऊ के प्रवेश द्वार राजधानी को एक नई सांस्कृतिक पहचान देंगे। यह पहल विकास और विरासत के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार के ये फैसले प्रशासनिक तेजी, बजट अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव—तीनों को साथ लेकर चलने की नीति को दर्शाते हैं। आने वाले समय में इसका असर जमीन पर दिखने की उम्मीद है।

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Tags: #seven entrances of Lucknow
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