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सेवा से संकल्प अभियान…सीएम डॉ.मोहन यादव ने की मंशा… सबकी सहभागिता हो…जनप्रतिनिधियों और आमजन को जोड़ें

DigitalDesk by DigitalDesk
September 11, 2026
in भोपाल, मध्य प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति
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seva se sankalp abhiyan
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58 लाख दीपों से सेवा का संकल्प, 50 लाख परिवारों को स्वामित्व का अधिकार

मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से सेवा और सुशासन को जनभागीदारी से जोड़ने वाला बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में दो महत्वपूर्ण अभियानों को उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया है। एक तरफ गांवों में लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान चलेगा, तो दूसरी तरफ सेवा से संकल्प अभियान के जरिए जनसेवा को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश होगी।

इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी तस्वीर 17 सितंबर की शाम सामने आएगी। शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाए जाएंगे। सरकार इसे सिर्फ दीप प्रज्ज्वलन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े परिवारों की ओर से सेवा और विकास के प्रति आभार और संकल्प के प्रतीक के तौर पर पेश कर रही है। यानी सरकार का संदेश साफ है। लाभार्थी सिर्फ योजना का लाभ लेने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विकास और सेवा के अभियान का सहभागी भी है।

50 लाख लोगों को मिलेगा संपत्ति का अधिकार

स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान इस पूरे कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक हिस्सा है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार से जुड़े दस्तावेजों का नि:शुल्क पंजीयन कराया जाएगा। सरकार के मुताबिक प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे किया जा चुका है। अभियान के जरिए 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसका सीधा असर गांव के उन परिवारों पर पड़ेगा जिनके पास संपत्ति तो है, लेकिन उसके कानूनी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति पर उनका अधिकार दस्तावेजी तौर पर मजबूत होगा। यानी यह अभियान सिर्फ कागज बनाने का अभियान नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण परिवारों को संपत्ति का कानूनी भरोसा देने की कोशिश की जा रही है।

सरकार देगी रजिस्ट्री की फीस में राहत

स्वामित्व अभियान में पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से छूट का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के दस्तावेज तैयार कराने में आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि अभियान का लाभ निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ समय-सीमा में हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए। यही वजह है कि प्रशासनिक स्तर पर इसकी माइक्रो प्लानिंग पर जोर दिया गया है। कलेक्टरों को अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है और जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की व्यवस्था की जा रही है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि इतने बड़े लक्ष्य को सिर्फ आंकड़ा न बनाया जाए, बल्कि हर पात्र परिवार तक वास्तविक लाभ पहुंचे। 

हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य

अभियान को जमीन पर तेजी से लागू करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर शिविर लगाएंगे। गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को विशेष शिविरों के जरिए नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की योजना है। हर निष्पादन अधिकारी के लिए रोजाना करीब 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य बताता है कि सरकार इस अभियान को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह नहीं, बल्कि मिशन मोड में आगे बढ़ाना चाहती है। लेकिन यहां सफलता सिर्फ रजिस्ट्री की संख्या से तय नहीं होगी। असली कसौटी होगी कि प्रक्रिया में किसी पात्र व्यक्ति को परेशानी न हो, दस्तावेजों में गलती न हो और किसी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता की शिकायत न आए।

अब सेवा का संकल्प, दीपों से जनभागीदारी

17 सितंबर से शुरू होने वाला दूसरा अभियान है सेवा से संकल्प अभियान। इसे एक महीने तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा। इस अभियान के जरिए सरकार का लक्ष्य जनसेवा, जनभागीदारी और विकसित मध्य प्रदेश के संकल्प को लोगों तक पहुंचाना है। लेकिन इसकी शुरुआत बेहद भावनात्मक तरीके से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे पूरे प्रदेश में 58 लाख से अधिक दीपक एक साथ जलाए जाएंगे। इन्हें लाभार्थी परिवारों के घरों के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर भी प्रज्ज्वलित किया जाएगा। यानी सरकार ने एक प्रशासनिक अभियान को जनभावना और उत्सव से जोड़ने की कोशिश की है।

महाकाल लोक में 25 लाख दीपों की तैयारी

इस अभियान का सबसे बड़ा आकर्षण उज्जैन का महाकाल लोक बनने जा रहा है। उज्जैन में 25 लाख से अधिक दीपक जलाने की तैयारी है। इसमें सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के साथ समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने की योजना है। खास बात यह है कि स्वामित्व अभियान के 50 लाख से अधिक हितग्राही भी इस दीपोत्सव में सहभागिता करेंगे। इससे दोनों अभियानों का एक सीधा संबंध भी दिखाई देता है। एक तरफ लोगों को संपत्ति का अधिकार मिलेगा, दूसरी तरफ वही लाभार्थी सेवा और विकास के संकल्प का हिस्सा बनेंगे।

13 गतिविधियों से बनेगा जनअभियान

सेवा से संकल्प अभियान को सिर्फ दीप प्रज्ज्वलन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके तहत 13 अलग-अलग गतिविधियां प्रस्तावित हैं। स्कूलों में विकसित भारत की संकल्पना पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। स्थानीय स्तर पर संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए कहानी और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम होंगे। लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को डिजिटल माध्यम से सामने लाने की योजना है। 7 अक्टूबर को सभी जिलों में सेवा ज्योति यात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा सरकार आपके द्वार शिविर, युवाओं के लिए रंगोली अभियान, हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज जैसे कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे। यानी सरकार का फोकस तीन पीढ़ियों पर दिखाई देता है।

बुजुर्गों और लाभार्थियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं।
बच्चों और विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक गतिविधियां।
और युवाओं के लिए नवाचार और भागीदारी के अवसर।

युवाओं को जोड़ने पर खास जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान में अधिकाधिक युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसका कारण भी साफ है। सरकार चाहती है कि सेवा और विकसित मध्य प्रदेश की बात सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं की भागीदारी के जरिए इसे सामाजिक अभियान का रूप मिले। हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज के जरिए विद्यार्थी, युवा, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट क्षेत्र के नवाचारी लोगों को जोड़ा जाएगा। यानी सेवा का अर्थ सिर्फ सरकारी योजना का लाभ पहुंचाना नहीं रखा गया है। इसमें युवा प्रतिभा, तकनीक और नवाचार को भी शामिल किया जा रहा है।

सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा भी

हालांकि इतने बड़े अभियान के साथ सरकार के सामने बड़ी चुनौती भी है। 58 लाख दीपक जलाना एक बड़ा आयोजन है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है 50 लाख से अधिक लोगों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को समय पर पूरा करना। क्योंकि जनता के लिए दीपक एक दिन का उत्सव है, लेकिन संपत्ति का दस्तावेज पूरे जीवन का अधिकार है। इसलिए स्वामित्व अभियान की सफलता का पैमाना सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितनी रजिस्ट्रियां हुईं। बल्कि यह होना चाहिए कि कितने परिवारों को अपने अधिकार का सुरक्षित दस्तावेज मिला। अगर अभियान पारदर्शी तरीके से पूरा होता है, तो ग्रामीण परिवारों के लिए यह सरकार की एक बड़ी सेवा साबित हो सकती है।

मोहन सरकार का डबल संदेश

इन दोनों अभियानों को एक साथ देखें तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार की रणनीति का एक व्यापक संदेश सामने आता है।

पहला. अधिकार।
दूसरा. सेवा।

स्वामित्व अभियान के जरिए सरकार ग्रामीण परिवारों को संपत्ति का अधिकार दस्तावेज के रूप में मजबूत करना चाहती है। सेवा से संकल्प अभियान के जरिए सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को जनभागीदारी और सामाजिक उत्सव से जोड़ना चाहती है। और 58 लाख दीपक इस पूरे अभियान की प्रतीकात्मक तस्वीर बनने जा रहे हैं। एक ऐसा दीपक जो सरकार के मुताबिक लाभार्थी परिवारों की उम्मीद, आभार और भविष्य के संकल्प का प्रतीक होगा।  17 सितंबर से मध्य प्रदेश में शुरू होने वाला यह अभियान सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं है। इसके जरिए सरकार अधिकार, सेवा और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

एक तरफ 50 लाख से ज्यादा लोगों को संपत्ति की नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ देने का लक्ष्य है। दूसरी तरफ 58 लाख दीपों के जरिए प्रदेशभर में जनभागीदारी का संदेश देने की तैयारी है। अब असली परीक्षा अमल की है। अगर हर पात्र परिवार को समय पर दस्तावेज मिला, प्रक्रिया पारदर्शी रही और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा, तो यह अभियान कागज से निकलकर जमीन पर बदलाव की कहानी बन सकता है। 17 सितंबर की शाम जलने वाले 58 लाख दीपक सिर्फ रोशनी नहीं करेंगे। उनके साथ एक बड़ा संदेश भी जाएगा। अधिकार भी. सेवा भी. और विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प भी.

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