Stock Market Today: उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी ने गंवाई शुरुआती बढ़त

सोमवार 29 दिसंबर को भारतीय शेयर बाजारों में तेज अस्थिरता देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों अपनी बढ़त खोकर लाल निशान में चले गए। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया, जिससे बाजार दिन के ऊपरी स्तरों से फिसलता चला गया।

शुरुआती तेजी ज्यादा देर नहीं टिक पाई

कारोबार के शुरुआती सत्र में बाजार ने सकारात्मक रुख दिखाया। सेंसेक्स एक समय 209 अंक यानी 0.24 फीसदी चढ़कर 85,250 के स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह निफ्टी भी 64.5 अंकों की मजबूती के साथ 26,106.80 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। हालांकि यह तेजी कुछ ही देर में कमजोर पड़ गई और बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा।

दिन के हाई से तेज गिरावट

सुबह करीब 11:30 बजे तक हालात पूरी तरह बदल चुके थे। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 500 अंक टूट गया और 277.55 अंकों यानी 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 84,763.91 पर कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी भी 75.35 अंक या 0.29 फीसदी फिसलकर 25,966.95 के आसपास आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 0.35 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई, जिससे व्यापक बाजार पर दबाव साफ नजर आया।

किन सेक्टर्स में ज्यादा दबाव

सेक्टर के लिहाज से देखें तो आईटी, बैंकिंग, पावर और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। साल के अंतिम दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम घटने से निवेशक सतर्क दिखाई दिए। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में निफ्टी-50 का औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम करीब 25 करोड़ शेयर रहा, जबकि नवंबर में यह लगभग 30 करोड़ शेयर था। चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक, साल के अंत में छुट्टियों के कारण बाजार में भागीदारी कम हो जाती है, जिससे वॉल्यूम घटता है और बाजार की चाल सुस्त रहती है।

विदेशी बिकवाली और क्रूड की मार

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 317.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह लगातार चौथा सत्र रहा, जब एफआईआई ने शुद्ध रूप से बिकवाली की। लगातार हो रही इस निकासी से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार में किसी बड़ी तेजी पर रोक लग गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.04 फीसदी बढ़कर 61.27 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की महंगाई से भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई के दबाव की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

कमजोर वैश्विक संकेत

वैश्विक स्तर पर भी संकेत खास उत्साहजनक नहीं रहे। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार लगभग सपाट बंद हुए थे, जबकि सोमवार सुबह भारतीय समय के अनुसार अमेरिकी फ्यूचर्स भी सुस्त नजर आए। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225 इंडेक्स गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा, जिससे घरेलू बाजारों पर भी नकारात्मक असर पड़ा।

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