Share Market Today: दोपहर के बाद क्यों टूटा शेयर बाजार? जानिए भारी बिकवाली के 4 बड़े कारण

उतार-चढ़ाव के बाद बाजार हुआ कमजोर

बुधवार 17 दिसंबर को भारतीय शेयर बाजार में दिनभर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती तेजी के बाद दोपहर के समय बाजार पर बिकवाली हावी हो गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 224 अंक गिरकर 84,455 के स्तर पर बंद होता नजर आया, जबकि निफ्टी 63 अंक फिसलकर 25,797 पर पहुंच गया। खास बात यह रही कि सेंसेक्स अपने दिन के उच्च स्तर से करीब 450 अंक नीचे आ गया।

बाजार की चौड़ाई ने दी कमजोरी की चेतावनी

दिन के कारोबार में बाजार की चौड़ाई भी कमजोर दिखाई दी। जहां 1,346 शेयरों में तेजी रही, वहीं 2,222 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। यह साफ इशारा करता है कि बिकवाली केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि बाजार में व्यापक दबाव बना रहा।

अमेरिका से आए मिले-जुले संकेत

बाजार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लेकर बनी अनिश्चितता रही। अमेरिका के नवंबर जॉब्स डेटा में नौकरियों की संख्या उम्मीद से बेहतर रही, लेकिन बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसी वजह से निवेशक अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर सतर्क नजर आए। इसका असर वॉल स्ट्रीट पर भी दिखा, जहां S&P 500 और Dow Jones में कमजोरी रही, जबकि Nasdaq मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

घरेलू बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। मंगलवार को FIIs ने करीब 2,060 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगभग 771 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह विदेशी बिकवाली के असर को कम नहीं कर पाई। लगातार आठ सत्रों से विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे धारणा कमजोर बनी हुई है।

तीसरा कारण: बैंकिंग शेयरों में दबाव

बैंकिंग सेक्टर की चाल ने भी बाजार को नीचे खींचा। हालांकि SBI के शेयरों में करीब 1.5% की तेजी रही, लेकिन ICICI Bank और HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली। चूंकि इन दोनों का निफ्टी में कुल वजन 20% से ज्यादा है, इसलिए इनकी कमजोरी का सीधा असर पूरे बाजार पर पड़ा।

चौथा कारण: कच्चे तेल में तेजी

कच्चे तेल की कीमतों में आई मजबूती ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकरों पर सख्ती के आदेश के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा, जिससे ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जो भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है।

तकनीकी नजरिए से बाजार की स्थिति

तकनीकी रूप से देखें तो निफ्टी 50 फिलहाल अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। 25,700 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह टूटता है तो बाजार 25,600–25,550 तक फिसल सकता है। वहीं ऊपर की ओर 26,000–26,050 का दायरा बड़ी रुकावट बना हुआ है।

 

नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। liveindia.news अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

 

 

 

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