Stock Market सेंसेक्स–निफ्टी अचानक धराशाई, निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये मिनटों में स्वाहा

मजबूत शुरुआत के बाद बाजार में जबरदस्त पलटवार, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरे

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार ने अप्रत्याशित उतार–चढ़ाव दिखाया। सुबह उम्मीदों के साथ खुलने वाला बाजार दोपहर तक आते-आते बुरी तरह दबाव में आ गया। सेंसेक्स 85,624 अंकों पर ओपन हुआ था, लेकिन कुछ ही घंटों में यह भारी फिसलन का शिकार होकर 805.47 अंक टूटकर 84,906.90 पर आ गया। शुक्रवार को जहां सेंसेक्स मजबूती के साथ 85,712 पर बंद हुआ था, वहीं सोमवार को माहौल पूरी तरह बदल चुका था। निफ्टी की हालत भी इसी तरह खराब रही—26,159.80 पर ओपन होने के बाद सूचकांक 280 अंक गिरकर 25,922.10 पर पहुंच गया। दोपहर 2 बजे तक सेंसेक्स 745 अंक गिर चुका था, जबकि निफ्टी लगभग 254 अंक नीचे कारोबार कर रहा था। यह परिवर्तन साफ दिखाता है कि बाजार का रुख कुछ ही घंटों में तेजी से निगेटिव हो गया।

क्यों टूटा पूरा बाजार? कौन-कौन से दबाव बने गिरावट की वजह

विश्लेषकों ने सोमवार की भारी गिरावट को कई कारकों के संयोजन का असर बताया। सबसे पहले, रुपये में लगातार कमजोरी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो भारत जैसे बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव डालती हैं, ने sentiment को और खराब किया। अगले हफ्ते होने वाली Federal Reserve की नीति बैठक भी निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रही है। अनुमान है कि फेड इस बार 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर सकता है, लेकिन दुनिया के बाकी सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकते हैं, जिससे निवेशकों ने ‘रिस्क-ऑफ’ मूड अपनाना शुरू कर दिया है। इन सबके ऊपर, इंडिगो संचालित InterGlobe Aviation के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट एविएशन सेक्टर के भविष्य को लेकर चालू चिंताओं को और बढ़ाती है और बाजार के समग्र sentiment पर सीधा असर डालती है। दूसरी तरफ, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी गहराती गई, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। जबकि RBI के रेपो रेट स्थिर रखने, डेढ़ लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सपोर्ट, और न्यूट्रल स्टांस जैसे फैसलों से बाजार में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।

निवेशकों को करारा झटका—मार्केट कैप में 8 लाख करोड़ की भारी गिरावट

सोमवार का दिन निवेशकों के लिए बेहद भारी साबित हुआ। केवल कुछ घंटों में ही भारतीय शेयर बाजार की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से करीब 8 लाख करोड़ रुपये गायब हो गए। जिन निवेशकों को RBI और ग्लोबल संकेतों के आधार पर तेजी की उम्मीद थी, वे अचानक आई इस गिरावट से हैरान रह गए। बड़ी, मध्यम और छोटी सभी श्रेणियों के शेयर दबाव में रहे। जहां कई ब्लू-चिप कंपनियों के शेयर लाल निशान में नजर आए, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर में 2% तक की गिरावट दर्ज हुई। निवेशकों की चिंताएं बढ़ाने वाली बात यह रही कि गिरावट सिर्फ एक-दो सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग पूरे बाजार ने कमजोरी दिखाई। पोर्टफोलियो में अचानक आई इस गिरावट से खुदरा निवेशक भी खासे प्रभावित हुए। कई लोगों ने पिछले हफ्ते की तेजी के आधार पर नई पोजिशन बनाई थीं, लेकिन सोमवार को बाजार ने सभी उम्मीदों को पलटकर रख दिया। बड़े निवेशकों और FIIs की भारी बिकवाली ने बाजार को गहरी चोट पहुंचाई, जिसका असर अभी कुछ दिनों तक देखने को मिल सकता है।

आगे क्या? फेड मीटिंग, कच्चा तेल और रुपये का रुख तय करेगा बाजार की दिशा

आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की चाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहने वाली है। फेड की आगामी बैठक सबसे बड़ा इवेंट है, और ब्याज दरों पर लिया गया कोई भी फैसला सीधा भारतीय बाजारों को प्रभावित करेगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी, और विदेशी निवेशकों की रणनीति भी बाजार को दिशा देंगे। घरेलू स्तर पर RBI ने जो कदम उठाए हैं, उनसे बाजार को स्थिरता मिल सकती है, लेकिन ग्लोबल अस्थिरता अभी भी बड़ा जोखिम बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक माहौल स्थिर नहीं होता, तब तक निवेशकों को सावधानी के साथ ही कदम बढ़ाना चाहिए। शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में जोखिम बढ़ गया है, जबकि लॉन्ग-टर्म निवेशकों को corrections को अवसर मानकर मजबूत शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, इसलिए निवेशकों को संयम और समझदारी की जरूरत होगी।

नोट- हमारे द्वारा दी गई सोने-चांदी की दरें सांकेतिक हैं और इसमें जीएसटी, टीसीएस और मेकिंग चार्ज जैसे अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं. सटीक दरों के लिए अपने स्थानीय जौहरी या ज्वैलर्स शॉप से संपर्क करें.

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