Indian markets Update: शेयर बाजार में जबरदस्त वापसी, सेंसेक्स 776 अंक उछला; निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा

लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक गिरावट झेलने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत शानदार तेजी के साथ की। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों का भरोसा लौटा। इसी सकारात्मक माहौल का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 776.01 अंक चढ़कर 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 228.50 अंक की बढ़त के साथ 23,995.95 के स्तर पर पहुंच गया।

कच्चे तेल में नरमी और वैश्विक संकेतों ने बाजार को दी नई मजबूती

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना, जिसका फायदा भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को मिला। रिपोर्ट के समय ब्रेंट क्रूड 87.72 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 82.12 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 4,098.02 डॉलर के आसपास रही। इन संकेतों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और बाजार में खरीदारी तेज हुई।

आईटी और रियल्टी सेक्टर की अगुवाई में सभी सेक्टरों में रही तेजी

सोमवार के कारोबार में लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा बढ़त निफ्टी आईटी में रही, जिसने 2.34 प्रतिशत की छलांग लगाई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी में 2.28 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। आईटी, वित्तीय सेवाओं और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

इन प्रमुख शेयरों ने बाजार की तेजी को दिया मजबूत सहारा

सेंसेक्स में Eternal, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, बीईएल, रिलायंस, अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, एसबीआई, एलएंडटी, मारुति और ट्रेंट जैसे शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और एक्सिस बैंक पर कुछ दबाव देखने को मिला।

विशेषज्ञ बोले- गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फिलहाल बेहतर विकल्प

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सोमवार की तेजी ने तकनीकी संकेतों को मजबूत किया है। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर बंद हुए हैं, जिससे निकट भविष्य में बाजार का रुख सकारात्मक रहने की संभावना बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी कंपनियों में गिरावट आने पर चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है, हालांकि जोखिम प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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