छांगुर बाबा और धर्मांतरण का गहराता षड्यंत्र
उत्तर प्रदेश एटीएस की जांच में छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन के खिलाफ सनसनीखेज खुलासा हुआ है। छांगुर पर आरोप है कि वह सुनियोजित तरीके से भारत में धर्मांतरण फैलाने की साजिश रच रहा था। यूपी एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि उसका संपर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी था। पूरे देश में फैले नेटवर्क के माध्यम से वह धर्मांतरण के जरिए भारत की डेमोग्राफी को प्रभावित करना चाहता था। सूत्रों के मुताबिक, वह नेपाल से बैठकर भारत में धर्मांतरण मिशन को ऑपरेट करता था, जो सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बन गया है।
3000 अनुयायियों की सेना: ‘लव जिहाद’ जैसे हथकंडों से धर्मांतरण
एटीएस के अनुसार, छांगुर बाबा के करीब 3000 सक्रिय अनुयायी देशभर में फैले हुए थे। ये लोग हिंदू नामों और पहचान के साथ युवतियों को प्रेमजाल में फंसाते और फिर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करते थे। यह पूरा नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों तक फैला हुआ था।
इस गिरोह का काम बेहद संगठित था—हर जिले में स्थानीय अनुयायी काम पर लगाए गए थे। ये लोग खुद को हिंदू दर्शाते, कॉलेज और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर युवतियों से संपर्क करते और फिर धीरे-धीरे मानसिक रूप से प्रभावित कर धर्मांतरण की तरफ धकेलते।
महबूब बना था इस्लामी मिशन का कमांडर
छांगुर बाबा ने अपने बेटे महबूब को इस पूरे अभियान का संचालन प्रमुख बनाया था। महबूब न केवल धर्मांतरण के मिशन को तकनीकी मदद देता था, बल्कि उसने एक खास टीम भी खड़ी की थी जो हिंदू युवतियों की पहचान कर रिपोर्ट बनाकर पिता तक पहुंचाती थी।
इस टीम में नवीन नामक एक युवक भी शामिल था, जिसने पहले स्वयं धर्म परिवर्तन किया और फिर गिरोह में तकनीकी भूमिका निभाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरोह जनसंख्या असंतुलन पैदा करने के उद्देश्य से काम कर रहा था।
आईएसआई से लिंक और नेपाल से कंट्रोल: देश के खिलाफ गहरी साजिश
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि छांगुर बाबा नेपाल में रहते हुए ISI के संपर्क में था। ISI की मदद से वह भारत में धर्म के नाम पर समाजिक अस्थिरता और सांस्कृतिक विघटन की साजिश रच रहा था। इस नेटवर्क के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य न सिर्फ भारत की डेमोग्राफिक प्रोफाइल को बिगाड़ना बल्कि हिंदू-मुस्लिम आबादी में असंतुलन पैदा करना भी था। इस तरह की गतिविधियां न केवल धार्मिक रूपांतरण का मामला हैं बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बहुत ही संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
एक्शन में एटीएस और ईडी
छांगुर बाबा इस समय 16 जुलाई तक यूपी एटीएस की कस्टडी में है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि मामला बेहद गहरा और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से छांगुर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। धर्मांतरण के लिए जो फंडिंग की गई, उसके स्रोतों की जांच की जा रही है। कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन और विदेशी बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है।
सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, सुनियोजित एजेंडा का हिस्सा था छांगुर
छांगुर बाबा का खुलासा किसी साधारण अपराध का नहीं, बल्कि देशविरोधी गतिविधियों और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की बड़ी साजिश का संकेत है। 3000 से ज्यादा लोगों को संगठित कर युवतियों को फंसाना, ISI से संपर्क रखना, धर्मांतरण के लिए फर्जी पहचान बनाना — ये सब देश की एकता और अखंडता पर सीधा हमला है। एटीएस और ईडी के साथ अन्य खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं। आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। अगर यह साजिश समय रहते उजागर न होती, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। यह मामला अब न केवल अपराध, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती बन चुका है, जिस पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।