चीन में भारत का नया चेहरा: कौन हैं विक्रम दोराईस्वामी?…जानें क्या है पत्रकारिता से संबंध

Vikram Doraiswami

चीन में भारत का नया चेहरा: कौन हैं विक्रम दोराईस्वामी?

भारत-चीन संबंधों के संवेदनशील दौर में भारत सरकार ने एक अहम कूटनीतिक फैसला लेते हुए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को चीन में नया राजदूत नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के रिश्ते कई चुनौतियों से गुजर रहे हैं और संतुलित, समझदारी भरी कूटनीति की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

  1. चीन में भारत का नया चेहरा
  2. कौन हैं विक्रम दोराईस्वामी?
  3. अनुभवी राजनयिक को बड़ी जिम्मेदारी
  4. चीन समझने वाला कूटनीतिक दांव
  5. रिश्ते सुधारने की नई पहल

पिछले कुछ वर्षों में भारत और China के संबंध खासकर पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद काफी जटिल हो गए थे। हालांकि अब दोनों देश धीरे-धीरे संबंधों को सामान्य करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बीजिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरे का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और इसी वजह से एक अनुभवी अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

शिक्षा और शुरुआती जीवन

विक्रम दोराईस्वामी ने University of Delhi से इतिहास में मास्टर्स की पढ़ाई की है। छात्र जीवन से ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक राजनीति में गहरी रुचि थी। यही रुचि आगे चलकर उन्हें कूटनीति के क्षेत्र में ले आई। सरकारी सेवा में आने से पहले उन्होंने कुछ समय पत्रकार के रूप में भी काम किया। इस अनुभव ने उन्हें समाज और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को समझने का व्यावहारिक नजरिया दिया, जो बाद में उनके कूटनीतिक करियर में काफी काम आया।

1992 में IFS में एंट्री

विक्रम दोराईस्वामी ने साल 1992 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) जॉइन की। नई दिल्ली में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कूटनीति के विभिन्न पहलुओं को समझा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बारीकियां सीखीं। उनकी पहली महत्वपूर्ण विदेशी पोस्टिंग 1994 में हांगकांग में हुई, जहां वे तीसरे सचिव के रूप में तैनात रहे। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक करियर की शुरुआत हुई।

चीन की भाषा और गहरी समझ

हांगकांग में रहते हुए उन्होंने चीनी भाषा सीखने का निर्णय लिया। उन्होंने Chinese University of Hong Kong के भाषा केंद्र में अध्ययन किया और मंदारिन भाषा पर अच्छी पकड़ बनाई। यह कौशल उनके करियर में एक बड़ी ताकत साबित हुआ, क्योंकि चीन से जुड़े मामलों में भाषा और संस्कृति की समझ बेहद अहम होती है।

बीजिंग का अनुभव पहले से

विक्रम दोराईस्वामी पहले भी चीन में काम कर चुके हैं। साल 1996 में उन्हें बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में तैनात किया गया था, जहां उन्होंने करीब चार वर्षों तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने चीन की राजनीतिक व्यवस्था, सामाजिक ढांचे और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझा।

ब्रिटेन में उच्चायुक्त का अनुभव

चीन जाने से पहले दोराईस्वामी United Kingdom में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत थे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में व्यापार, शिक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई।

क्यों अहम है यह नियुक्ति?

भारत और चीन के बीच मौजूदा हालात को देखते हुए यह नियुक्ति बेहद रणनीतिक मानी जा रही है। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों के बीच संवाद बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में एक ऐसे राजनयिक की जरूरत थी, जिसे चीन की भाषा, संस्कृति और राजनीतिक व्यवस्था की गहरी समझ हो—और विक्रम दोराईस्वामी इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।

संतुलित कूटनीति की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि दोराईस्वामी का अनुभव और शांत कूटनीतिक शैली भारत-चीन संबंधों में स्थिरता लाने में मदद कर सकती है। उनका पिछला अनुभव और चीन से जुड़ी समझ उन्हें इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाती है। कुल मिलाकर, विक्रम दोराईस्वामी की नियुक्ति यह संकेत देती है कि भारत चीन के साथ रिश्तों को संभालने के लिए गंभीर और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है। आने वाले समय में उनकी भूमिका दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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