इंडिया AI समिट’ में अर्धनग्न प्रदर्शन…जानें आरोप साबित हुए तो आधे नंगे कांग्रेसियों को कितनी हो सकती है सज़ा?…क्या कहती है नरसिम्हा की राहुल के साथ सामने आई ये तस्वीर !

Semi nude protest at India AI Summit

राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी की रा​ष्ट्र भक्ति पर बीजेपी सवाल खड़े कर रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि आधे नंगे होकर प्रदर्शन की पूरी रणनीति राहुल गांधी के बंगले पर बनी थी। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपने कपड़े उतारकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का विरोध जताया। यह हंगामा भारत मंडपम स्थित समिट हॉल के बाहर हुआ, जिससे कार्यक्रम में कुछ समय के लिए व्यवधान भी उत्पन्न हुआ।

इस विरोध के तरीके को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में इस तरह का प्रदर्शन कर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का उदाहरण है दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। अब तक चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डालने और कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने के आरोप में कार्रवाई की गई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में FIR दर्ज की गई है। अब सवाल उठ रहा है कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कितनी सज़ा हो सकती है?

किन धाराओं में कार्रवाई संभव?

पुलिस आमतौर पर ऐसे मामलों में ये धाराएं लगा सकती है:

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 186 – सरकारी काम में बाधा डालना (3 महीने तक की सजा या जुर्माना या दोनों)

धारा 353 – सरकारी कर्मचारी पर बल या हमला (2 साल तक की सजा)

धारा 294 – अश्लील हरकत या नारेबाजी (3 महीने तक की सजा या जुर्माना)

धारा 188 – आदेश का उल्लंघन (6 महीने तक की सजा)

यदि सुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ या कार्यक्रम में गंभीर व्यवधान हुआ हो तो अन्य कड़ी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

सटीक धाराएं पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर निर्भर करती हैं।

क्या सजा मिलना तय है ?

गैर-जमानती धाराएं लगी हैं तो अदालत से जमानत लेनी होगी।

पहली बार अपराध होने और हिंसा न होने की स्थिति में अक्सर अदालतें जमानत दे देती हैं।

सज़ा का फैसला ट्रायल के बाद ही होता है।

क्या देश की छवि को नुकसान भी अपराध है?

सीधे तौर पर “देश की छवि धूमिल करना” अलग से अपराध की श्रेणी में नहीं आता, जब तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा, हिंसा या दंगा भड़काने जैसी गंभीर स्थिति न हो। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में सुरक्षा उल्लंघन गंभीर माना जाता है। यदि आरोप साबित होते हैं तो 3 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा संभव है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-कौन सी धाराएं लागू की गई हैं और अदालत क्या निर्णय देती है। फिलहाल अंतिम फैसला न्यायालय की सुनवाई के बाद ही तय होगा।

शर्टलेस प्रदर्शन..4 आरोपी गिरफ्तार

एआई इम्पैक्ट समिट में शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस खुद घिर चुकी है। इस मामले में चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने FIR में कई गंभीर धाराएं लगाईं हैं। पुलिस के साथ आरोपियों ने प्रदर्शन के दौरान हाथपाई भी की है। दिल्ली पुलिस इस मामले को लेकर लार्जर कॉन्सपिरेसी की भी जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों में कृष्णा हरि राष्ट्रीय सचिव, यूथ कांग्रेस, बिहार…कुंदन यादव, राज्य सचिव, बिहार…अजय कुमार प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तरप्रदेश और नरसिम्हा यादव नेशनल कोऑर्डिनेटर तेलंगाना राज्य के रूप में की गई है। बता दें इनमें से तेलंगाना के नरसिम्हा यादव की तस्वीर भी राहुल गांधी के साथ सामने आ चुकी है।

शर्टलेस प्रदर्शन..10 बिंदुओं पर जांच

शर्टलेस प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ तिलक मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की है। प्रदर्शन के दौरान अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के विरोध में नारेबाजी की गई और कार्यक्रम में कुछ समय के लिए व्यवधान भी उत्पन्न हुआ।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब 10 अहम बिंदुओं पर जांच कर रही है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी भारत मंडपम तक कैसे पहुंचे और वे पहले कहां ठहरे थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वे दिल्ली कब आए और यदि गाड़ियों से पहुंचे तो वे वाहन किसके नाम पर पंजीकृत हैं। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि हंगामे से पहले उन्होंने किन-किन लोगों से संपर्क किया। टी-शर्ट कहां प्रिंट हुई, उसका भुगतान किसने किया और काली छतरी लेकर अंदर घुसने की कथित योजना किसकी थी—इन पहलुओं की भी पड़ताल हो रही है। पुलिस यह भी जानना चाहती है कि प्रदर्शन की योजना स्वतः बनाई गई थी या किसी के निर्देश पर अमल किया गया।

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