उज्जैन में होगा द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन…सीएम के साथ केंद्रीय गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे शिरकत
महाकाल की नगरी उज्जैन 27 अगस्त को एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहने वाली है। इस दिन यहां द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का आयोजन होगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत संयुक्त रूप से करेंगे। इस मौके पर आध्यात्मिक पर्यटन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट “आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमूह का मार्गदर्शन” का विमोचन भी किया जाएगा। यह रिपोर्ट पीएचडीसीसीआई और केपीएमजी द्वारा तैयार की गई है, जिसमें भारत के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर बढ़ते पर्यटक दबाव और बेहतर प्रबंधन के लिए समाधान सुझाए गए हैं।
आस्था और पर्यटन के संगम पर होगी चर्चा
आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास मुख्य वक्ता
धार्मिक आध्यात्मिक स्थलों पर बढ़ता पर्यटक दबाव और बेहतर प्रबंधन
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक गुरुओं और विशेषज्ञों की उपस्थिति रहेगी। गौरांग दास प्रभु मुख्य वक्ता के रूप में आध्यात्मिक पर्यटन के महत्व और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर अपने विचार रखेंगे।
आयोजन में प्रमुख भागीदारी
वैसे उज्जैन में आयोजित यह सम्मेलन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री PHDCCI की ओर से पर्यटन मंत्रालय और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से आयोजित किया जाने वाला है। इस सम्मेलन में पर्यटन मंत्रालय के अपर सचिव महानिदेशक सुमन बिल्ला के साथ मध्यप्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव पर्यटन शिव शेखर शुक्ला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं।
सम्मेलन की प्रमुख झलकियां
कार्यक्रम के दौरान सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच गोलमेज चर्चा होगी, जिसमें आध्यात्मिक पर्यटन को लेकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, जिम्मेदार और टिकाऊ आतिथ्य प्रणाली, तथा सांस्कृतिक संवर्धन पर विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा, कई विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे जिनमें आध्यात्मिक पर्यटन के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की जाएगी। इन सत्रों का उद्देश्य यह समझना है कि किस प्रकार धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राओं को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिले।
महत्व क्यों है यह सम्मेलन?
उज्जैन, जहां भगवान महाकाल का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से मध्यप्रदेश न केवल अपने पर्यटन ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का भी संकल्प जता रहा है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





