मध्य प्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। बीजेपी और कांग्रेस के बड़े नेता एक दूसरे पर हमलावर हैं। इसी बीच टीकमगढ़ पहुंचे कमलनाथ ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तंज कसा और कहा कि हमें किसी सिंधिया की जरूरत नहीं है। यदि वे इतनी बड़ी तोप थे तो चुनाव क्यों हार गए? अब इस पर सियासी बयानबाजी हो रही है। सिंधिया ने ट्वीट करते हुए कमलनाथ पर निशाना साधा है।
- कमलनाथ ने साधा सिंधिया पर निशाना
- ‘सिंधिया कोई तोप नहीं हैं’
- ‘सिंधिया कोई तोप नहीं, हमें उनकी जरूरत नहीं’
- ‘इतने बड़े नेता थे तो चुनाव क्यों हारे?’
- सिंधिया ने किया कमलनाथ पर ट्वीटवार
- ’15 महीनों की तोप सरकार का रिकॉर्ड’
- ‘तबादला उद्योग, वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार’
- ‘माफिया-राज, कमलनाथ जी अच्छा है’
- ‘आपकी इस तोप की परिभाषा में फिट नहीं हुआ’
टीकमगढ़ में कमलनाथ से मीडिया ने सवाल किया था कि इस बार विधानसभा चुनाव में आपके पास ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं हैं तो फिर कौन होगा? इसके जवाब में कमलनाथ ने सिंधिया को लेकर कहा कि उन्हें किसी सिंधिया की जरूरत नहीं है। सिंधिया कोई तोप नहीं हैं। अगर, वो इतने बड़े तोप थे तो ग्वालियर और मुरैना में महापौर का चुनाव नहीं हारते। कमलनाथ के हमलवार रुख को देखते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पलटवार किया है।
सिंधिया ने साधा कमलनाथ पर निशाना
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्वीट कर पूर्व सीएम कमलनाथ पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखा मध्य प्रदेश कांग्रेस के 15 महीनों की तोप सरकार का रिकॉर्ड। तबादला उद्योग, वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार, माफिया-राज, कमलनाथ जी अच्छा है। आपकी इस तोप की परिभाषा में फिट नहीं हुआ।
सिंधिया कुछ तो हैं,तभी तो कमलनाथ सड़क पर आ गए—कैलाश
इसे लेकर जब बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय से भी सवाल किया गया तो कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ तो होंगे तभी तो कांग्रेस और कमलनाथ सड़क पर आ गए हैं। बता दें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीते शुक्रवार को कहा था कि उनके पूर्व पार्टी सहयोगी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ग्वालियर क्षेत्र में भी राजनीतिक तौर पर बेमानी हो गए हैं। कमलनाथ ने विश्वास जताते हुए कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में विजयी होगी।
2020 में गिरी थी कमलनाथ की सरकार
दरअसल साल 2020 मप्र में उस समय जब कोरोना फैल रहा था। वहीं मप्र में सियासी उथलपुथल भी मची हुई थी। इस उथलपुथल के बीच मार्च के महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। तब कांग्रेस सत्ता में थी। कमलनाथ सीएम थे। ऐसे में सिंधिया समर्थक विधायक भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल करते हुए मध्य प्रदेश की सत्ता से 15 सालों का सूखा खत्म किया था। लेकिन महज 15 महीनों में ही इस राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस की सरकार चली गई थी। कांग्रेस की सरकार गिरने और कमलनाथ के सीएम का पद छोड़ने के बाद से ही सिंधिया अक्सर कांग्रेस और कांग्रेसियों के निशाने पर रहते हैं।




