धार्मिक आस्था के साथ जुड़ा विज्ञान… जानिए व्रत में सेंधा नमक खाने की वजह

Science meets religious faith

सावन व्रत में सेंधा नमक ही क्यों?…

सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना के लिए लाखों श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं। इस दौरान फलाहार में सामान्य नमक की जगह केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। इसके पीछे धार्मिक परंपरा के साथ वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि शरीर और मन की शुद्धि भी है। इसलिए व्रत में प्राकृतिक, सात्विक और कम प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है और इसे पारंपरिक रूप से अधिक शुद्ध माना जाता है, इसलिए इसे व्रत के लिए उपयुक्त माना गया है।

वैज्ञानिक दृष्टि से भी सेंधा नमक इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं, जो लंबे उपवास के दौरान शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह दावा कि इसमें सामान्य आयोडीन युक्त नमक की तुलना में हमेशा कम सोडियम होता है, सभी प्रकार के सेंधा नमक पर लागू नहीं होता। विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में ही किसी भी प्रकार के नमक के सेवन की सलाह देते हैं।

व्रत के दौरान साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, फल और दही जैसे खाद्य पदार्थों में सेंधा नमक मिलाकर सेवन किया जाता है। इससे स्वाद के साथ शरीर को आवश्यक खनिज भी मिल सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे सेंधा नमक हो या सामान्य नमक, दोनों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

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