सऊदी अरब ने नवंबर 2026 के लिए एशियाई देशों को बेचे जाने वाले कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब ने अपने अरब लाइट क्रूड की आधिकारिक बिक्री कीमत यानी OSP में एशिया के लिए 3 डॉलर प्रति बैरल की कमी की है। इसके बाद यह तेल ओमान और दुबई के औसत बेंचमार्क से करीब 5 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर उपलब्ध होगा। जून 2020 के बाद यह एशियाई खरीदारों के लिए सबसे बड़ा डिस्काउंट बताया जा रहा है। खास बात यह है कि यह फैसला बाजार की उम्मीदों से अलग है। इससे पहले एक रॉयटर्स सर्वे में पश्चिम एशियाई बेंचमार्क में मजबूती को देखते हुए नवंबर की कीमत में करीब 3 डॉलर की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था।
एशिया के लिए अरब लाइट के दाम घटे, भारी ग्रेड के क्रूड पर भी बड़ी राहत
सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने एशिया को मिलने वाले अरब लाइट क्रूड की कीमत घटाने के साथ-साथ भारी ग्रेड के तेल की कीमतों में भी कटौती की है। अरब मीडियम और अरब हेवी क्रूड के नवंबर OSP में 5 डॉलर प्रति बैरल की कमी की गई है। अक्टूबर में एशियाई ग्राहकों को अरब लाइट क्रूड पर पहले से ही 2 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट मिल रहा था। नवंबर के लिए यह छूट और बढ़ाकर 3 डॉलर कर दी गई है। कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों अहम है सऊदी का यह फैसला, सरकारी तेल कंपनियों को मिल सकता है फायदा
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है और सऊदी अरब देश के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में सऊदी क्रूड सस्ता होने से भारतीय रिफाइनरियों को कच्चा माल खरीदने में राहत मिल सकती है। इंडियन ऑयल और BPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के लिए कम कीमत पर क्रूड खरीदने से रिफाइनिंग मार्जिन को फायदा मिल सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इसलिए सऊदी की छूट से भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तत्काल कितनी राहत मिलेगी, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अन्य लागतों पर भी निर्भर करेगा।
बढ़े टैंकर किराए ने सऊदी अरामको को कीमत घटाने के लिए किया मजबूर
मध्य पूर्व में बढ़े तनाव का असर केवल कच्चे तेल की कीमतों पर नहीं बल्कि उसकी ढुलाई पर भी पड़ा है। फारस की खाड़ी से चीन तक कच्चा तेल पहुंचाने वाले बड़े तेल टैंकर यानी VLCC की बुकिंग लागत में भारी उछाल आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह खर्च पिछले साल करीब 80 हजार डॉलर प्रतिदिन था, जो अब बढ़कर लगभग 12 लाख डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। बढ़े हुए मालभाड़े का सीधा असर एशियाई रिफाइनरियों की लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में अरामको की ओर से क्रूड की कीमत घटाने का एक मकसद खरीदारों की कुल लागत को संतुलित करना और एशिया में अपनी बिक्री बनाए रखना भी माना जा रहा है।
रूस और ईरान की सस्ती सप्लाई के बीच बाजार हिस्सेदारी बचाने की चुनौती
सऊदी अरब के सामने एशियाई बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बड़ी चुनौती है। रूस और ईरान जैसे तेल उत्पादक देश भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को आकर्षक छूट के साथ कच्चा तेल उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में यदि सऊदी क्रूड अपेक्षाकृत महंगा रहता है, तो एशियाई रिफाइनरियां दूसरे सप्लायरों की ओर रुख कर सकती हैं। बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए सऊदी ने कीमतों में कटौती का रास्ता चुना है। दूसरी तरफ 3 अक्टूबर 2026 को हूती विद्रोहियों की ओर से रियाद और खुरैस में अरामको के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बाद बाजार में चिंता बढ़ी। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 0.79 प्रतिशत बढ़कर 103.06 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा।