पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक का सोमवार सुबह निधन हो गया। 78 वर्षीय सत्यपाल मलिक ने दिल्ली के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री से लेकर विपक्षी नेताओं तक ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। मलिक का राजनीतिक सफर हमेशा चर्चा में रहा—चाहे वो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का दौर हो या फिर किसान आंदोलन पर खुलकर बोलना।
कई राज्यों के राज्यपाल रहे
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक करियर बेहद विविधतापूर्ण रहा। वे बिहार, गोवा, मेघालय और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के राज्यपाल रह चुके थे। खासकर जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के दौरान ही अनुच्छेद 370 हटाया गया, जो ऐतिहासिक फैसला माना जाता है। उनके राज्यपाल रहते हुए कई राजनीतिक उथल-पुथल भी देखी गईं, लेकिन उन्होंने हर बार अपनी बेबाक शैली से सबको चौंकाया
किसान आंदोलन में खुलकर बोले
राज्यपाल पद पर रहते हुए सत्यपाल मलिक ने कई बार केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। खासतौर पर किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के पक्ष में खुलकर बयान दिए और सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उनके इस रवैये को लेकर वे कई बार विवादों में भी आए लेकिन उन्होंने अपने विचारों से कभी समझौता नहीं किया
देश ने खोया एक बेबाक नेता
सत्यपाल मलिक का जाना भारतीय राजनीति की एक बेबाक आवाज का जाना है। वे भले ही पदों पर रहे हों, लेकिन उन्होंने जनता के सवालों से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है। उनकी बातें और विचार आने वाले समय में भी याद किए जाएंगे।





