कूनो नेशनल पार्क से दुखद खबर… मादा चीता ‘नभा’ की मौत…शिकार के दौरान हुई थी गंभीर घायल
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर दुखद समाचार सामने आया है। नामीबिया से लाई गई आठ वर्षीय मादा चीता ‘नभा’ की शनिवार, 12 जुलाई 2025 को मृत्यु हो गई। नभा करीब एक सप्ताह पहले शिकार के दौरान घायल हो गई थी और उसका इलाज जारी था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
चीता प्रोजेक्ट को एक और झटका, नभा नहीं रही
अब कूनो में 26 चीते बचे
9 वयस्क चीते…जिनमें 6 मादा और 3 नर
17 शावक भी हैं कूनो की शान
चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट में यह घटना एक और बड़ा झटका मानी जा रही है। खासकर तब जब भारत में चीतों को दोबारा बसाने की यह महत्वाकांक्षी योजना वैश्विक निगरानी में है।
कैसे लगी थीं नभा को चोटें?
कूनो पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा के अनुसार, नभा अपने सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर में शिकार करने की कोशिश कर रही थी। उसी दौरान उसे गंभीर चोटें आईं। उसकी बाईं ओर की उल्ना और फिबुला हड्डियों में फ्रैक्चर हुआ था और शरीर के अन्य हिस्सों में भी जख्म थे। इलाज के बावजूद नभा का स्वास्थ्य धीरे-धीरे और बिगड़ता गया।
शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है, जिससे मौत के पीछे की स्पष्ट वजह सामने आएगी।
अब कूनो में कितने चीते बचे हैं?
नभा की मृत्यु के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब कुल 26 चीते बचे हैं:
9 वयस्क चीते (6 मादा और 3 नर) 17 शावक, जो भारत में ही जन्मे हैं
इनमें से 16 चीते जंगल में स्वतंत्र रूप से रह रहे हैं, जिनमें शिकारी प्रवृत्तियां विकसित हो चुकी हैं। 2 नर चीतों को गांधीसागर ट्रांसफर किया गया है और वे वहां अनुकूल स्थिति में हैं।
चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी जारी
नभा की मौत के बाद भी बाकी बचे चीतों की निगरानी और चिकित्सा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्क प्रबंधन ने हाल ही में सभी चीतों को एंटी-एक्टो-पैरासिटिक दवाएं दी हैं, ताकि उनकी सेहत बेहतर बनी रहे और किसी संक्रमण की संभावना को रोका जा सके। फिलहाल बाकी सभी चीते स्वस्थ हैं और पार्क में सामान्य रूप से विचरण कर रहे हैं।
चीता प्रोजेक्ट को लेकर उठे सवाल
नभा की मौत से एक बार फिर इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं। 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट के तहत नामिबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीते लाए गए थे। लेकिन अब तक कई चीतों की असमय मृत्यु ने इस महत्वाकांक्षी योजना की सतत निगरानी और पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चीतों को लाकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं, बल्कि स्थायी निगरानी, व्यवहारिक अध्ययन और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार लाना बेहद जरूरी है।
निगरानी और जवाबदेही की ज़रूरत
नभा की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने की राह आसान नहीं है। अब जरूरत है कि प्रशासन और नीति निर्माता मिलकर चीता पुनर्वास योजना की पुन: समीक्षा करें, जोखिम को पहले से पहचानने की प्रणाली विकसित करें और वन्यजीव चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि हर चीता को व्यवस्थित ट्रैकिंग, समय पर हस्तक्षेप और प्राकृतिक अनुकूलन की पूरी सुविधा मिले। नभा की मौत केवल एक मादा चीता की मृत्यु नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि वन्यजीव संरक्षण केवल दिखावे की योजना नहीं, बल्कि स्थायित्व, समर्पण और वैज्ञानिक सोच की मांग करता है