पायलट के आरोप से वसुंधरा खफा,किससे कहा— वे खुद को पंसारी समझ लेते हैं, नींबू के रस और दूध का कोई मेल नहीं

Sachin Pilot Vasundhara Raje Scindia

राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ने गहलोत के साथ मिलीभगत के आरोप पर सचिन पायलट को निशाने पर लिया है। वसुंधरा राजे ने पायलट का नाम लिए बिना कहा- कई लोग षड्यन्त्रपूर्वक एक ही झूठ बोलते आ रहे हैं कि ‘वो तो मिले हुए हैं, उनमें तो मिलीभगत हैं’। जिनसे सिद्धांत नहीं मिलते, विचारधारा नहीं मिलती, रोज-रोज जो कर्णभेदी व अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उनसे मिलीभगत कैसे सम्भव है? क्या कभी दूध और नींबू रस आपस में मिल सकते हैं? कुछ नये-नये राजनीतिज्ञों में ये जरूर होता है। उन्हें हल्दी की गांठ क्या मिल जाती है, वे खुद को पंसारी समझ लेते हैं। न छोटों से सद व्यवहार और न बड़ों का सम्मान। पर हमारी भाजपा में ऐसा नहीं है।

वसुंधरा राजे ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वसुंधरा राजे ने सूरतगढ़ में विश्नोई समाज द्वारा आयोजित जम्भेश्वर मंदिर कलश स्थापना समारोह में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। वसुंधरा राजे ने ट्वीट किया-विश्नोई समाज के 29 नियमों में झूठ नहीं बोलना, निंदा नहीं करने, अहंकार का त्याग, चोरी नहीं करने जैसे कई ऐसे नियम हैं, जिनकी हम सभी को पालना करनी चाहिए। लेकिन आज राजस्थान में कई ऐसी चीजे हो रही हैं जो सर्वसमाज के विरुद्ध हैं। कई लोगों को तो निन्दा और झूठे आरोप लगाए बिना नींद ही नहीं आती, लेकिन झूठे आरोप उसी पर लगते हैं, जो विपक्ष की नींद उड़ा कर रखें।हमें ‘अहंकार के त्याग’ नियम का अनुसरण करना चाहिए। कुछ नये-नये राजनीतिज्ञों में ये जरूर होता है। उन्हें हल्दी की गांठ क्या मिल जाती है, वे खुद को पंसारी समझ लेते हैं। न छोटों से सद व्यवहार और न बड़ों का सम्मान। पर हमारी भाजपा में ऐसा नहीं है।

भ्रष्टाचार राहत कैम्प लगाने का दिया सुझाव

वहीं वसुंधरा ने कहा कांग्रेस की गहलोत सरकार महंगाई राहत कैंपों का दिखावा कर रही है। जब कैंप लगाना ही है तो इन्हें भ्रष्टाचार राहत कैम्प लगाने चाहिए। जिससे महंगाई अपने आप कम हो जाएगी। उन्होंने कहा राजस्थान राज्य की जनता को समझना चाहिए कि जो पूरे समाज का भला कर सके। ऐसे लोगों का ही साथ दें, जिससे आपके आशीर्वाद से एक बार फिर सत्ता में आकर हम आपकी सेवा कर सके। अपने राजस्थान का विकास कर सकें, इसे उन्नत प्रदेश बना सके।

पायलट के आरोप से वसुंधरा खफा,किससे कहा— वे खुद को पंसारी समझ लेते हैं

Exit mobile version