Russia’s Vladimir Putin Likely To Visit India: दिसंबर में भारत दौरे पर आ सकते हैं व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी संग अहम बातचीत; अमेरिका पर भी पड़ेगा असर

Russia’s Vladimir Putin Likely To Visit India: दिसंबर में भारत दौरे पर आ सकते हैं व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी संग अहम बातचीत; अमेरिका पर भी पड़ेगा असर

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा कर सकते हैं। यह दौरा 5 और 6 दिसंबर को होने की संभावना है, जिसमें उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तय मानी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच यह उच्चस्तरीय शिखर वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत के सामान पर 50% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उनका तर्क है कि रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना ज़रूरी है ताकि वह यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर हो।

भारत का कहना है कि तेल खरीदना उसकी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि यूरोप ने परंपरागत आपूर्ति से किनारा कर लिया था। यही कारण है कि रूस आज भारत का बड़ा ऊर्जा सप्लायर बन चुका है। वहीं, रक्षा सहयोग की लंबी परंपरा के चलते रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता भी बना हुआ है। पुतिन की यात्रा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत दुनिया को यह संकेत देगा कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वह अमेरिका या किसी भी पश्चिमी दबाव में आकर अपने रिश्ते नहीं तोड़ेगा।

पुतिन की यात्रा का महत्व
दिसंबर में होने वाली पुतिन-मोदी मुलाकात को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिका ने भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ का हथियार अपनाया है, लेकिन भारत इस दौरे से यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसके रूस से संबंध किसी भी तरह की सियासी खींचतान में कमज़ोर नहीं होंगे।

तेल कारोबार पर बढ़ा विवाद
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूस से तेल खरीदने में दूरी बना ली थी। ऐसे में भारत ने रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत किया। अमेरिका इसे रूस के राजस्व को बढ़ावा देने वाला कदम मानता है, जबकि भारत का कहना है कि यह फैसला सिर्फ राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया गया।

दशकों पुराना भारत-रूस सहयोग
भारत और रूस का रिश्ता कोई नया नहीं है। सोवियत संघ के दौर से ही दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में गहरी साझेदारी निभाई है। आज भी भारतीय सेना के ज़्यादातर बड़े हथियार रूस से ही आते हैं। यही वजह है कि पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों को और गहरा करेगा।

अमेरिका को कड़ा संदेश
पुतिन की भारत यात्रा को अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। भारत यह जताना चाहता है कि वह वैश्विक राजनीति में संतुलन की भूमिका निभाएगा और किसी भी दबाव के बावजूद अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखेगा।

 

 

 

 

 

 

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