रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घटाने की नीति अपनाई थी। इसके बावजूद रूस से तेल और गैस की खरीद को लेकर यूरोप की रणनीति पर सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध कराए गए आंकड़े के मुताबिक, 2022 से अब तक यूरोप ने रूस से करीब 30 लाख करोड़ रुपये का तेल और गैस खरीदा है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने जुलाई 2025 में गुजरात स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे। इस रिफाइनरी में रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी रही है। इन घटनाओं के बीच यह सवाल उठता है कि रूस की ऊर्जा से दूरी बनाने की घोषणा और वास्तविक खरीद के बीच कितना अंतर रहा है। हालांकि, कुल खरीद की राशि और उसमें तेल व गैस का अलग-अलग हिस्सा समझने के लिए मूल आंकड़ों तथा उनकी गणना की पुष्टि जरूरी है।
2022 के बाद रूसी ऊर्जा की खरीद पर उठे सवाल, यूरोप के खर्च का आंकड़ा चर्चा में
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय संघ ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए REPowerEU योजना के तहत कदम उठाए। इसके बावजूद संक्रमण काल में रूसी गैस और तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं हुई। यूरोपीय आयोग के अनुसार, 2021 में यूरोपीय संघ की कुल गैस आयात जरूरत का 45 प्रतिशत रूस से आता था, जो 2024 में घटकर 19 प्रतिशत रह गया।
करीब 30 लाख करोड़ रुपये की खरीद का दावा इसी व्यापक ऊर्जा कारोबार के संदर्भ में सामने आता है, लेकिन इस राशि की अवधि, गणना और तेल-गैस के अलग-अलग हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
जुलाई 2025 में नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध, रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी बनी वजह 18 जुलाई 2025 को यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 18वां पैकेज अपनाया। इसमें गुजरात के वाडिनार स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी को भी सूचीबद्ध किया गया। यूरोपीय संघ के दस्तावेज के मुताबिक, रूसी सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल का बड़ा प्रसंस्करण केंद्र है। इस कदम का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना था। रोसनेफ्ट ने प्रतिबंधों को अनुचित बताते हुए उनका विरोध किया था।
रूसी तेल-गैस से दूरी बनाने की योजना, लेकिन बदलाव के लिए तय की गई समयसीमा
यूरोपीय आयोग ने 17 जून 2025 को रूसी तेल और गैस के आयात को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव रखा था। इस योजना में 2027 के अंत तक रूसी तेल और गैस से छुटकारा पाने का लक्ष्य शामिल था।
यानी यूरोप ने तत्काल सभी खरीद रोकने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति को दूसरे स्रोतों से जोड़ने और निर्भरता घटाने की प्रक्रिया अपनाई। इसी वजह से प्रतिबंधों और रूसी ऊर्जा की जारी खरीद के बीच अंतर दिखाई देता रहा। इसलिए पूरे यूरोप की नीति को केवल एक घोषणा के आधार पर समझने के बजाय उसके वास्तविक आयात आंकड़ों और लागू नियमों को देखना जरूरी है।
यूरोप की ऊर्जा नीति पर बहस, प्रतिबंध और वास्तविक खरीद के आंकड़े अहम
रूस से ऊर्जा खरीद और भारत की नायरा एनर्जी पर लगाए गए प्रतिबंधों की तुलना ने यूरोप की नीति को लेकर बहस को बढ़ाया है। हालांकि, दोनों मामलों की कानूनी और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं। रूसी ऊर्जा पर यूरोपीय संघ की निर्भरता पहले के मुकाबले कम हुई है, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म करने की प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ी। इसलिए 30 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसके मूल स्रोत की जांच आवश्यक है। मुख्य सवाल यह है कि ऊर्जा सुरक्षा, प्रतिबंधों और व्यापारिक हितों के बीच यूरोप अपनी नीति को किस तरह लागू करता है।