मिडिल ईस्ट में तनाव: रूस ने भारत को कच्चे तेल की बड़ी खेप भेजने की जताई तैयारी, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा को राहत

Russia has expressed readiness to send a large consignment of crude oil to India

रूस ने भारत को कच्चे तेल की बड़ी खेप भेजने की जताई तैयारी, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा को राहत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रूस ने भारत को कच्चे तेल की बड़ी खेप भेजने की तैयारी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार रूस करीब 95 लाख बैरल कच्चा तेल भारत भेजने के लिए तैयार हो गया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह खेप समय पर भारत पहुंचती है तो इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल भारत के पास उपलब्ध रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मिलाकर करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक बचा हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में रूस का यह कदम भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सबसे बड़ा असर तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से एशियाई और यूरोपीय देशों तक पहुंचता है। हालिया घटनाक्रम में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने और सुरक्षा कारणों से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट से आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।

रूस बना भारत का अहम ऊर्जा साझेदार

पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर तेल खरीदना शुरू किया था। इससे भारत को ऊर्जा लागत कम रखने में मदद मिली। विशेषज्ञों के मुताबिक रूस से आने वाली संभावित 95 लाख बैरल तेल की खेप भारत के लिए एक रणनीतिक सपोर्ट साबित हो सकती है। इससे भारत को वैकल्पिक आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी और बाजार में संभावित कमी की स्थिति से भी निपटा जा सकेगा।

वैश्विक बाजार में तेल कीमतों पर असर

मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमा न है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। तेल कीमतों में तेजी आने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं। भारत भी इनमें शामिल है, इसलिए सरकार और ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

भारत की रणनीतिक तैयारी

भारत सरकार पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर तैयारी कर रही है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के अलावा सरकार अलग-अलग देशों से तेल आयात के विकल्प भी मजबूत कर रही है। रूस, अमेरिका, अफ्रीकी देशों और लैटिन अमेरिकी देशों से भी आपूर्ति बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। रूस की ओर से प्रस्तावित यह तेल खेप ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। यदि यह आपूर्ति जल्द भारत पहुंचती है तो इससे न केवल घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण हालात के बीच रूस का भारत को कच्चा तेल भेजने का फैसला दोनों देशों के मजबूत ऊर्जा संबंधों को भी दर्शाता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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