कर्नाटक विधानसभा में गूंजा आरएसएस का गीत…जानें डीके शिवकुमार ने क्यों गाया ”नमस्ते सदा—वत्सले—मातृभूमि” …
कर्नाटक विधानसभा का सत्र हमेशा ही गरमागर्म बहस और राजनीतिक टकराव का केंद्र रहा है। लेकिन गुरुवार 21 अगस्त का दिन बेंगलुरु। में कुछ अलग ही रंग लेकर आया। सदन में मौजूद विधायकों और दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों के लिए यह किसी आश्चर्य से कम नहीं था, जब राज्य के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता डीके शिवकुमार ने अचानक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रसिद्ध प्रार्थना गीत “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि…” गाना शुरू कर दिया। उनके मुंह से यह गीत सुनकर सदन में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई, फिर विपक्षी विधायकों की तालियां गूंज उठीं और सोशल मीडिया पर देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया।
कर्नाटक विस में गरम माहौल और गूंज उठा RSS गीत
विधानसभा में क्यों गूंजा RSS का प्रार्थना गीत
कर्नाटक के डिप्टी CM डीके शिवकुमार क्यों गाने लगे संघ का गीत?
यह पूरा घटनाक्रम तब हुआ जब विधानसभा में भाजपा विधायक आर. अशोक ने आरसीबी भगदड़ की घटना को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने सीधा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस घटना की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
इस पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा “आप लोग बार-बार हमें RSS से जोड़ते हैं, मैं बता दूं कि हमें आपकी चालें पता हैं। इसके बाद उन्होंने अचानक ही RSS का प्रार्थना गीत गाना शुरू कर दिया “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि… कुछ ही पंक्तियां गाईं, लेकिन इतना काफी था कि सदन का माहौल बदल जाए।
वीडियो हुआ वायरल
जैसे ही सदन की कार्यवाही का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर आया, वीडियो आग की तरह फैल गया। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी। भाजपा समर्थकों ने लिखा कि “कांग्रेस का असली चेहरा उजागर हो गया। कांग्रेस समर्थकों ने इसे शिवकुमार की “चतुर राजनीतिक चाल” बताया। वहीं, कई यूजर्स ने मजाकिया लहजे में लिखा “शायद डीके शिवकुमार को RSS की ट्रेनिंग ले लेनी चाहिए।
क्या है RSS का यह गीत?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह गीत उनकी शाखाओं में प्रतिदिन गाया जाता है। गीत की रचना कवि नारायण हरिप्रसाद बेथलकर (वंदे मातरम् भावप्रकाश) ने की थी। इसे संघ की पहचान और संगठनात्मक भावना से जोड़ा जाता है। शब्दों में मातृभूमि के प्रति समर्पण, राष्ट्रप्रेम और सेवा का आह्वान किया गया है। इस गीत को गाकर शिवकुमार ने न केवल भाजपा विधायकों को चौंकाया, बल्कि अपने विरोधियों को यह संदेश भी दिया कि “वे उनकी भाषा में भी जवाब देना जानते हैं।”
राजनीतिक मायने क्या हैं?
कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार अपने आक्रामक अंदाज और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। विधानसभा में RSS का गीत गाना उनके लिए केवल एक पल का भावावेश नहीं था, बल्कि इसे कई राजनीतिक संदेशों से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा पर पलटवार
भाजपा अक्सर कांग्रेस को “एंटी-हिंदू” बताती रही है। शिवकुमार का यह कदम इस आरोप को ध्वस्त करने का एक तरीका माना जा रहा है।
हिंदुत्व की राजनीति में पैठ
कांग्रेस ने हाल ही में कई बार ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति अपनाई है। राहुल गांधी के मंदिर दर्शन हों या कर्नाटक में देवी-देवताओं से जुड़े फैसले, पार्टी इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
विधानसभा में संदेश
सदन में गाया गया गीत भाजपा विधायकों को एक तरह की चुनौती भी था—“हमारे पास भी हिंदुत्व की समझ है, इसे सिर्फ आप ही के ठेके में नहीं दिया जा सकता।”
भाजपा का पलटवार
घटना के बाद भाजपा नेताओं ने तुरंत शिवकुमार को घेरना शुरू कर दिया। आर. अशोक ने कहा—“यह कांग्रेस की दोहरी नीति है। चुनाव के समय हिंदुत्व का मुखौटा पहनना और सत्ता में आते ही वोट बैंक की राजनीति करना, यही इनका असली चेहरा है। भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसा—“शायद अब कांग्रेस भी संघ की शाखाओं में जाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस का बचाव
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिवकुमार ने केवल विपक्ष की राजनीति का मजाक उड़ाने के लिए यह गीत गाया। कांग्रेस विधायक ने कहा—“RSS का गीत गाना कोई अपराध नहीं। यह देशभक्ति का ही हिस्सा है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि भाजपा बार-बार कांग्रेस को हिंदुत्व विरोधी कहकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करती है, और शिवकुमार का कदम इसका करारा जवाब है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस
घटना के बाद ट्विटर और व्हाट्सएप पर ढेरों मीम्स और चुटकुले भी चलने लगे। एक यूजर ने लिखा—“डीके शिवकुमार ने RSS का गीत गाया, अब अगली शाखा में हाजिरी लगाएंगे। दूसरे ने मजाक किया—“क्या यह 2028 चुनाव की तैयारी है?। वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि “राजनीति चाहे जो हो, अगर मातृभूमि की स्तुति की जाती है तो उसका स्वागत होना चाहिए। बहरहाल कर्नाटक विधानसभा में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का RSS प्रार्थना गीत गाना सिर्फ एक “इंस्टेंट रिएक्शन” नहीं था, बल्कि एक “राजनीतिक स्टेटमेंट” भी था। उन्होंने भाजपा को उसकी ही भाषा में जवाब देकर नया सियासी समीकरण खड़ा कर दिया है।
अब देखना होगा कि यह घटनाक्रम सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस और मीम्स तक सिमटकर रह जाता है या फिर कर्नाटक की राजनीति में आने वाले समय में कांग्रेस और भाजपा दोनों की रणनीतियों को बदलने वाला साबित होता है। प्रकाश कुमार पांडेय