जब मोदी बोलते हैं, दुनिया सुनती है’ — RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की पीएम मोदी की तारीफ
RSS के 100 साल पूरे होने पर पुणे में कहा— भारत की बढ़ती ताकत ने दुनिया का ध्यान खींचा
पुणे, 02 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि और विश्व मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री मोदी बोलते हैं, तो दुनिया के नेता ध्यान से सुनते हैं, और इसका मुख्य कारण भारत की उभरती ताकत और बढ़ता वैश्विक सम्मान है।
भागवत के अनुसार यह बदलाव संयोग नहीं, बल्कि लंबे संघर्षों, समर्पित प्रयासों और समाज को जोड़ने की अथक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें संघ के स्वयंसेवकों का बड़ा योगदान है। कार्यक्रम में उन्होंने संघ के 100 साल के सफर, संगठन की चुनौतियों और आगे की दिशा पर विस्तार से बात की।
‘क्यों ध्यान से सुना जाता है मोदी को?’ — भागवत का बड़ा बयान
शताब्दी समारोह में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा “प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में ध्यान से सुना जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत की ताकत अब वहां दिख रही है, जहां उसे दिखाई देनी चाहिए। और इसने विश्व का ध्यान खींचा है।” भागवत ने कहा कि पहले भारत की आवाज़ को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। वैश्विक मंचों—G20, BRICS, UN—सब में भारत की भूमिका को सम्मान के साथ स्वीकार किया जा रहा है।
‘जब भारत आगे बढ़ता है, दुनिया में शांति बढ़ती है’
भागवत ने कार्यक्रम में एक बड़े दावे के साथ भारत की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा “इतिहास गवाह है—जब भारत आगे बढ़ता है, दुनिया की समस्याएं कम होती हैं, झगड़े समाप्त होते हैं और शांति का विस्तार होता है। उन्होंने इसे समय की जरूरत बताते हुए कहा कि मौजूदा ग्लोबल परिस्थितियाँ भारत के नेतृत्व और संतुलनकारी भूमिका की मांग कर रही हैं।
भागवत के अनुसार, संघ के स्वयंसेवक पहले दिन से इसी मिशन को लेकर काम कर रहे हैं — समाज को जोड़ना, राष्ट्र को मजबूत करना और भारत को उसका वैश्विक स्थान दिलाना।
RSS के 100 साल: संघर्ष, बदलाव और मिशन की निरंतरता
1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में स्थापित RSS अब 100 वर्ष का हो गया है। भागवत ने इस अवसर पर संघ के शुरुआती संघर्षों को याद किया—
सीमित साधन
तीखी आलोचना
अनेक प्रतिबंध
सामाजिक गलतफहमियाँ
राजनीतिक दबाव
उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने अनेकों तूफानों का सामना किया, बहुत सी चुनौतियों को पार किया, लेकिन मिशन से पीछे नहीं हटे।
भागवत बोले “आज हम 100 साल पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं, लेकिन हमें सोचना चाहिए कि समाज को जोड़ने के इस काम में इतना समय क्यों लग गया। हमें पहले ही आगे बढ़ जाना चाहिए था।” उन्होंने कहा कि जश्न केवल प्रतीकात्मक न हो, बल्कि हमें तय समय में काम पूरा करने की संस्कृति अपनानी चाहिए।
‘हमारी ताकत—एकता में विविधता’
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भारतीय समाज की मूल संरचना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा “भारत में विचारधाराएँ भले अलग-अलग हों, लेकिन सबकी जड़ एक ही है। हमारी विविधता ही हमारी एकता की नींव है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि “कर्तव्य और समन्वय” है, जो समाज को जोड़कर रखता है।
भागवत ने कहा कि बातचीत और मिलकर आगे बढ़ने की शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है।
जुबली का इंतज़ार क्यों? — लक्ष्य समय पर पूरा करने की सीख
भागवत ने कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि किसी उपलब्धि का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य बड़ा हो या छोटा। उपलब्धि सालों बाद आए या जल्दी। इंतजार करने के बजाय समय सीमा तय करनी चाहिए और उसी में काम पूरा करना चाहिए।
भागवत ने कहा कि संघ इसी सिद्धांत पर चलता है—समाज को संगठित करने का काम समय का इंतजार नहीं करता, बल्कि रोज़ की छोटी क्रियाओं में ही आगे बढ़ता है।
भारत की वैश्विक भूमिका—अब दुनिया स्वीकार कर रही है
भागवत ने भारत के उभार को सिर्फ ऊर्जा और जनसंख्या की वजह से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक शक्ति की वजह से बताया।
उन्होंने कहा भारत का दृष्टिकोण शांति, संवाद और संतुलन पर आधारित है। दुनिया अब भारत को समस्या-सुलझाने वाले देश के रूप में देख रही है। PM मोदी का प्रभाव वही दिखाता है—जब भारत बोलता है, दुनिया सुनती है। यह संदेश RSS के सौ वर्षों के कार्य और संगठन के व्यापक सामाजिक प्रभाव की ओर भी इशारा करता है।
भागवत का भाषण—संघ के भविष्य और भारत की भूमिका का रोडमैप
मोहन भागवत का यह भाषण तीन बड़ी बातों पर केंद्रित रहा भारत की वैश्विक साख और PM मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति। RSS के 100 सालों की यात्रा और समाज को जोड़ने का मिशन। भविष्य के लिए स्पष्ट संदेश—एकता, समयबद्धता और मजबूत राष्ट्रीय पहचान। उनके अनुसार भारत का समय आ गया है और दुनिया अब भारत से नेतृत्व की उम्मीद कर रही है। भागवत ने कहा कि भारत तभी विश्वगुरु बनेगा, जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ेगा—और यही RSS का सबसे बड़ा लक्ष्य है। (प्रकाश कुमार पाण्डेय )