चीन के इस इनडोर फुटबॉल मैदान में AI की मदद से रोबोट खेलते हैं फुटबॉल…!

Robots play football with the help of AI in this indoor football field in China

चीन के इस इनडोर फुटबॉल मैदान में एआई की मदद से रोबोट खेलते हैं फुटबॉल…!

बीजिंग के बाहरी इलाके में बड़ी संख्या में युवा चीनी उद्यमी चेंग हाओ एक इनडोर फुटबॉल मैदान में बैठे नजर आए,लेकिन यह मैदान इंसानों के खेलने के लिए नहीं है। यह वह जगह है जहाँ उनकी स्टार्ट-अप कंपनी बूस्टर रोबोटिक्स Booster Robotics के इंजीनियर मानव जैसे रोबोटों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से फुटबॉल खेलना सिखाते हैं। ये रोबोट ड्रिब्लिंग करना, पास देना, गोल पर शॉट लगाना और विरोधी के शॉट को रोकना जैसी गतिविधियाँ सीखते हैं।

बीजिंग में जन्मे 37 वर्षीय चेंग हाओ, पिछले एक दशक से चीन द्वारा ह्यूमनॉइड रोबोट तकनीक के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की अगली पंक्ति में खड़े हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में अपनी कंपनी की स्थापना की। उन्हें यह प्रेरणा टेस्ला के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट ऑप्टिमस के लॉन्च और उस समय क्रांतिकारी माने जा रहे चैटजीपीटी-4 के आने से मिली। उनका लक्ष्य दुनिया के सबसे उन्नत फुटबॉल खेलने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित करना है।

चेंग हाओ ने सीएनएन से बातचीत में कहा, “दुनिया में सैकड़ों रोबोट फुटबॉल टीमें हैं। हमें इस खास क्षेत्र में सबसे पहले आगे निकलना है और फिर अन्य बाज़ारों में प्रवेश करना है।”चीन का रोबोट उद्योग 2015 के बाद तेज़ी से आगे बढ़ा, जब सरकार ने रोबोटिक्स को उन 10 प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया, जिन्हें देश के औद्योगिक ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए चुना गया था। इसका उद्देश्य चीन की पहचान केवल सस्ते श्रम वाले देश के रूप में खत्म करना था। आज, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन में 150 से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट कंपनियाँ काम कर रही हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। चेंग हाओ जैसे कई रोबोट स्टार्ट-अप्स के लिए खेल एक तरह की प्रयोगशाला बन गए हैं, जहाँ रोबोटों की क्षमताओं को परखा जा सकता है और उनके वास्तविक जीवन में उपयोग की संभावनाओं को समझा जा सकता है।

इसी कारण 2025 में चीन में रोबोट खेल आयोजनों की बाढ़ आ गई। देश के सबसे बड़े वार्षिक मनोरंजन कार्यक्रम स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में दर्जनों रोबोटों ने एक साथ मंच पर नृत्य किया। ह्यूमनॉइड रोबोटों ने अपनी पहली हाफ-मैराथन दौड़ पूरी की। इसके अलावा, बीजिंग में दुनिया के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स का आयोजन किया गया, जिसमें फुटबॉल, बॉक्सिंग, मार्शल आर्ट्स और अन्य खेलों में रोबोटों की क्षमताओं की परीक्षा ली गई।

यह रोबोट खेलों का उन्माद ऐसे समय में सामने आया है जब ह्यूमनॉइड रोबोट अमेरिका और अन्य देशों के साथ चीन की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का एक अहम मोर्चा बन चुके हैं। चीन न केवल इस बहु-अरब डॉलर के बाज़ार की संभावनाओं को भुनाने की दौड़ में है, बल्कि एक तेज़ी से बूढ़ी होती जनसंख्या वाले देश में उत्पादकता बढ़ाने के लिए भी रोबोटों को महत्वपूर्ण मानता है।

फुटबॉल ही क्यों?

जब सीएनएन ने चेंग हाओ से उनकी प्रयोगशाला में मुलाकात की, तो इंजीनियर रोबोटों को अंतिम रूप देने में लगे थे। एक रोबोट को छत से बंधी रस्सी के सहारे लटकाया गया था, और एक इंजीनियर रिमोट कंट्रोल की मदद से उसे कूदने और संतुलन के साथ उतरने का अभ्यास करा रहा था। इसका उद्देश्य रोबोट का संतुलन और स्थिरता परखना था। वहीं, एक अन्य इंजीनियर एक छोटे आकार के इनडोर फुटबॉल मैदान में चलते हुए रोबोट का मार्गदर्शन कर रहा था और बार-बार उसके पुर्ज़ों की बारीकी से जाँच कर रहा था। बूस्टर रोबोटिक्स की टीम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट रोबोकप (RoboCup) की तैयारी कर रही थी, जो कुछ ही दिनों में होने वाला था। इस प्रतियोगिता में रोबोटों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ज़रिए खेल खेलने की क्षमता की कड़ी परीक्षा होती है।

वैज्ञानिकों के लिए फुटबॉल लंबे समय से रोबोटों की परीक्षा का एक मानक कार्य रहा है। इसका शुरुआती परीक्षण 1990 के दशक में शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप जापान के नागोया शहर में पहली रोबोकप प्रतियोगिता आयोजित की गई। आज यह एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय आयोजन बन चुका है।
रोबोकप के पूर्व अध्यक्ष और टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर पीटर स्टोन का कहना है कि रोबोट फुटबॉल खेलने के लिए कई “मौलिक क्षमताओं” की आवश्यकता होती है। इनमें गति, दृष्टि, स्थान की पहचान, टीम के साथ रणनीतिक योजना बनाना और विरोधी की चालों को समझना शामिल है। पीटर स्टोन, जो सोनी एआई के मुख्य वैज्ञानिक भी हैं, कहते हैं “रोबोकप का एक प्रेरणादायक लक्ष्य यह है कि ऐसे रोबोटों की टीम बनाई जाए जो असली फुटबॉल मैदान पर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मानव टीम को हरा सके। मैं इसकी तुलना चाँद पर इंसान को उतारने जैसी चुनौती से करता हूँ। यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी तकनीकी लक्ष्य है, जिसे केवल विज्ञान और इंजीनियरिंग में निरंतर प्रगति से ही हासिल किया जा सकता है।”

चेंग हाओ का फुटबॉल खेलने वाले रोबोटों के प्रति जुनून बचपन से ही शुरू हो गया था। वे फुटबॉल देखते हुए बड़े हुए और हाई स्कूल में उन्हें रोबोटों से प्यार हो गया। उनकी स्नातक पढ़ाई में भी यह शामिल था कि रोबोटों को फुटबॉल खेलना कैसे सिखाया जाए। लेकिन अब चेंग इससे आगे की सोच रहे हैं। वे कहते हैं “हम मानते हैं कि रोबोटों का फुटबॉल खेलना सिर्फ एक परीक्षा है। इस खेल के ज़रिए हम कई तकनीकों का परीक्षण करते हैं, लेकिन भविष्य में यही तकनीकें कारखानों और घरों में उपयोग की जाएँगी।

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