“जनता का प्रतिनिधि हूं, फोन करना मेरा हक है” – विवाद में बोले भाई वीरेंद्र, सरकार पर बदनाम करने का लगाया आरोप पटना के मनेर विधानसभा क्षेत्र के RJD विधायक भाई वीरेंद्र और पंचायत सचिव संदीप भारती के बीच हुई एक टेलीफोनिक बातचीत की रिकॉर्डिंग ने विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। चुनाव के चलते मामला तब तूल पकड़ रहा है। वहीं सचिव ने भी विधायक के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद बातचीत की रिकॉर्डिंगसोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
भाई वीरेंद्र ने दी सफाई..
सचिव ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के बदले रिश्वत मांगी थी, विवाद के बाद सफाई देते हुए RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और यह पूरा मामला दरअसल उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। विधायक ने कहा हम जनप्रतिनिधि हैं। जनता जहां परेशान होगी, वहां फोन करना मेरा अधिकार है। सचिव ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के बदले रिश्वत मांगी थी,।इसलिए हमने सवाल किया। हमने सिर्फ काम पूछा और बताया कि हम विधायक भाई वीरेंद्र बोल रहे हैं।” RJD विधायक ने यह भी कहा कि कॉल के दौरान उन्होंने कोई भी अपमानजनक शब्द या जातिसूचक टिप्पणी नहीं की थी, बल्कि सचिव ने ही संवाद के दौरान अभद्रता दिखाई।
राजनीतिक साजिश का आरोप
भाई वीरेंद्र ने इस विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा
“सरकार के लोग हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने विधानसभा में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे, इसलिए अब बदले की भावना से इस तरह के षड्यंत्र किए जा रहे हैं। लेकिन मैं जनता का सेवक हूं और जनता ही मेरा मालिक है। मैं डरने वाला नहीं हूं।”
सचिव ने दर्ज कराई फिर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंचायत सचिव संदीप भारती ने SC-ST थाना में भाई वीरेंद्र के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। उनका कहना है वह भयभीत है। RJD विधायक ने जूते से मारने की धमकी दी और कहा कि ट्रांसफर की बात मत करो, कुछ भी हो सकता है। अगर जरूरत पड़ी तो सुरक्षा की मांग करूंगा।
संदीप ने यह भी बताया कि विधायक ने उन्हें रिंकु देवी के पोते के मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित कार्य के लिए कॉल किया था, लेकिन बातचीत में मर्यादा लांघी गई।
सोशल मीडिया पर वायरल कॉल
सोशल मीडिया पर वायरल कॉल की वजह से यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। वायरल क्लिप में कुछ कठोर शब्द सुनाई देते हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया। हालांकि विधायक ने पोस्ट के जरिए खेद भी जताया और कहा कि अगर कुछ कठोर शब्द निकल गए, तो मुझे खेद है, लेकिन जनता के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”
विपक्ष और सत्तापक्ष की प्रतिक्रियाएं
इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सत्तापक्ष इसे प्रशासनिक अधिकारी के सम्मान का मामला बता रहा है, जबकि आरजेडी समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रहे हैं। विधायक और सचिव के बीच हुई इस कहासुनी ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या सामने आता है – क्या यह वाकई जनसेवा से जुड़ी नाराजगी थी या फिर कोई साजिश, जैसा कि RJD विधायक दावा कर रहे हैं।





