Republic Day 2026: पहली परेड कहां हुई, 21 तोपों की सलामी का रहस्य क्या? जानिए गणतंत्र दिवस से जुड़े 10 रोचक तथ्य
नई दिल्ली (Republic Day 2026)। हर साल 26 जनवरी को पूरा देश तिरंगे के रंग में रंग जाता है। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरकारी दफ्तरों में ध्वजारोहण और राजधानी दिल्ली में भव्य परेड—गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक स्वप्न और संवैधानिक मूल्यों का उत्सव है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। साल 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणतंत्र दिवस के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? या फिर पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी और 21 तोपों की सलामी का क्या महत्व है? आइए, गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान से जुड़े ऐसे ही 10 रोचक तथ्यों को जानते हैं, जो हर भारतीय को गर्व से भर देंगे।
1. 26 जनवरी ही क्यों बनी ऐतिहासिक तारीख?
26 जनवरी का संबंध सीधे 1930 के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है। इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ की घोषणा की थी। आज़ादी से पहले यह दिन स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा के रूप में मनाया जाता था। इसी ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के लिए संविधान लागू करने की तारीख भी 26 जनवरी 1950 तय की गई।
2. दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान
भारतीय संविधान को दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है। जब यह लागू हुआ, तब इसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं। समय के साथ संशोधनों के कारण यह और अधिक विस्तृत हो चुका है। इसकी खास बात यह है कि इसमें नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ सरकार के कर्तव्यों को भी विस्तार से परिभाषित किया गया है।
3. न टाइपिंग, न प्रिंटिंग—सब हाथों का कमाल
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान का मूल दस्तावेज न तो टाइप किया गया था और न ही प्रिंट। इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने सुंदर इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा था। यह आज भी संसद भवन की लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा गया है।
4. शांतिनिकेतन के कलाकारों की अनोखी सजावट
संविधान के हर पन्ने को शांतिनिकेतन के प्रसिद्ध कलाकारों ने सजाया था। इस कार्य में नंदलाल बोस और उनके शिष्यों का बड़ा योगदान रहा। प्रत्येक पृष्ठ पर भारत की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और विविधता की झलक देखने को मिलती है।
5. संविधान बनने में लगा करीब तीन साल
भारतीय संविधान को तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। इस दौरान संविधान सभा ने दुनिया के कई देशों—जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और आयरलैंड—के संविधानों का गहन अध्ययन किया और भारत के लिए उपयुक्त प्रावधान अपनाए।
6. ‘उधार का थैला’ नहीं, विचारों का संगम
अक्सर भारतीय संविधान को ‘उधार का थैला’ कहा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। संविधान ने अन्य देशों से प्रेरणा जरूर ली, लेकिन उन्हें भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुसार ढाला गया। जैसे—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांस से प्रेरित हैं, जबकि संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से।
7. पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी?
आज गणतंत्र दिवस परेड कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर होती है, लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था। 1950 से 1954 तक परेड कर्तव्य पथ पर नहीं, बल्कि इरविन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), लाल किला और रामलीला मैदान में आयोजित की गई थी। 1955 से परेड का स्थायी स्थान राजपथ बना।
8. 21 तोपों की सलामी का रहस्य
गणतंत्र दिवस पर जब राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं, तो उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह सैन्य सम्मान का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है और राष्ट्राध्यक्ष के सम्मान में दिया जाता है। दुनिया भर में 21 तोपों की सलामी सर्वोच्च राजकीय सम्मान का संकेत है।
9. ‘अबाइड विद मी’ से भारतीय धुनों तक
बीटिंग रिट्रीट समारोह में लंबे समय तक ब्रिटिश काल की धुन ‘अबाइड विद मी’ बजाई जाती थी। लेकिन अब भारतीय संस्कृति और संगीत को प्राथमिकता दी जा रही है। आज इस समारोह में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे देशभक्ति गीत और भारतीय धुनें सुनाई देती हैं।
10. मुख्य अतिथि की गौरवशाली परंपरा
भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे। तब से हर साल किसी न किसी मित्र राष्ट्र के प्रमुख को आमंत्रित करने की परंपरा चली आ रही है, जो भारत की वैश्विक कूटनीति और मित्रता का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि आज़ादी केवल संघर्ष से नहीं, बल्कि संविधान से सुरक्षित होती है। यह दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। जब कर्तव्य पथ पर परेड गुजरती है और आसमान में तिरंगा लहराता है, तो हर भारतीय के दिल से यही आवाज़ निकलती है—मेरा भारत महान!