पेट्रोल-डीजल के दाम में आज भी राहत, लेकिन जेब पर दबाव बरकरार! 18 सितंबर के रेट से समझिए तेल का पूरा गणित
18 सितंबर 2026 को देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर बना हुआ है। भोपाल में पेट्रोल ₹114.45 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर है। उपलब्ध ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में लगातार कई दिनों से यही कीमत बनी हुई है।
लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि आज दाम नहीं बढ़े। असली सवाल है कि क्या यह स्थिरता आम आदमी के लिए राहत है, या महंगे ईंधन का नया सामान्य?
25 मई के बाद नहीं बदला मूल रेट
पेट्रोल-डीजल के दाम में आखिरी बड़ी बढ़ोतरी 25 मई 2026 को हुई थी। उस दिन पेट्रोल औसतन ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हुआ था। दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 पहुंच गया था। यह मई में कीमत बढ़ने की चौथी किस्त थी और कुल बढ़ोतरी करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक पहुंच गई थी।
यानी 18 सितंबर तक करीब चार महीने से देश के प्रमुख शहरों में पंप पर मूल खुदरा कीमतों में कोई बड़ी संशोधन वाली बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि अलग-अलग शहरों में स्थानीय कर और अन्य घटकों की वजह से कीमत अलग रहती है।
फिर भोपाल में पेट्रोल ₹114 के पार क्यों?
यही सबसे अहम सवाल है। दिल्ली और भोपाल के पेट्रोल रेट में करीब ₹12 से ज्यादा का अंतर है।
इसका बड़ा कारण है कि पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होती। इसमें केंद्रीय कर, राज्य का वैट, डीलर कमीशन और अन्य लागत शामिल होती हैं। इसलिए एक ही दिन देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल की कीमत अलग हो सकती है।
भोपाल में 18 सितंबर को पेट्रोल ₹114.45 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
आज बड़े शहरों में क्या भाव?
आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक 18 सितंबर को प्रमुख शहरों में पेट्रोल का भाव इस प्रकार है—
दिल्ली: ₹102.12
मुंबई: ₹111.31
कोलकाता: ₹113.51
चेन्नई: ₹107.78
लखनऊ: ₹101.86
पटना: ₹113.35
भोपाल: ₹114.45
बेंगलुरु: ₹111.68
डीजल में—
दिल्ली: ₹95.20
मुंबई: ₹97.97
कोलकाता: ₹99.82
चेन्नई: ₹99.56
लखनऊ: ₹95.36
पटना: ₹99.36
भोपाल: ₹99.55
बेंगलुरु: ₹99.56
इससे साफ है कि दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के आसपास है, जबकि भोपाल जैसे शहरों में यह ₹114 के पार है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार का कितना असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम ईंधन की लागत को प्रभावित कर सकते हैं। मई में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के दबाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार कीमतों में बढ़ोतरी की थी।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—कच्चे तेल की कीमत घटने का मतलब यह नहीं कि अगले ही दिन पेट्रोल-डीजल उतनी ही मात्रा में सस्ता हो जाएगा। अंतिम खुदरा कीमत में कर और दूसरे शुल्क भी शामिल होते हैं।
आम आदमी के लिए असली राहत कहां है?
ईंधन की कीमत स्थिर रहने का सीधा फायदा वाहन मालिकों को यह मिलता है कि रोजमर्रा का ईंधन बजट अचानक नहीं बिगड़ता। लेकिन महंगे पेट्रोल-डीजल का असर सिर्फ कार या बाइक के टैंक तक सीमित नहीं रहता।
डीजल की कीमत परिवहन लागत से जुड़ी है। ट्रक, बस, कृषि मशीनरी और माल ढुलाई में डीजल का इस्तेमाल होता है। इसलिए लंबे समय तक महंगा ईंधन सब्जियों, खाद्य पदार्थों और दूसरे सामान की ढुलाई लागत पर भी दबाव डाल सकता है।
यानी 18 सितंबर की तस्वीर को दो हिस्सों में समझना होगा—आज कीमत नहीं बढ़ी, इसलिए तत्काल राहत है; लेकिन मौजूदा ऊंचे स्तर पर कीमत बनी रहना अपने आप में बड़ी राहत नहीं है।
रेट चेक करने का आसान तरीका
पेट्रोल पंप जाने से पहले अपने शहर का ताजा भाव मोबाइल से भी पता किया जा सकता है। इंडियन ऑयल के लिए 9224992249, भारत पेट्रोलियम के लिए 9223112222 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए 9222201122 पर संदेश भेजकर रेट की जानकारी ली जा सकती है।
18 सितंबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बड़ी नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। लेकिन चार महीने पहले हुई बड़ी बढ़ोतरी के बाद कीमतें जिस स्तर पर पहुंची थीं, वे अब भी उसी ऊंचे स्तर के आसपास हैं। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि आज दाम बढ़े या नहीं—सवाल यह भी है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, रुपये और टैक्स का गणित उपभोक्ता की जेब को किस दिशा में ले जाता है।





