रेल सफर का खर्च होगा कम। रफ्तार वही, किराया घटाने की तैयारी।
नया साल 2027 रेल यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर लेकर आ सकता है। अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो जनवरी से आपकी यात्रा का खर्च कुछ कम हो सकता है। रेलवे 1 जनवरी 2027 से 40 से ज्यादा ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त कर उन्हें सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में चलाने की तैयारी में है। रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग रेलवे जोन की सूचियों में ऐसी कम से कम 47 ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। इनमें महानगरी, प्रगति, तुलसी और सप्तक्रांति जैसी चर्चित ट्रेनें शामिल हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज खत्म होने से मिलेगा। फिलहाल सुपरफास्ट ट्रेन में सफर करने पर सामान्य किराये के अलावा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। नया वर्गीकरण लागू होने के बाद दूसरी श्रेणी में 15 रुपये, स्लीपर में 30 रुपये, एसी चेयरकार और एसी थ्री टियर व सेकेंड एसी में 45 रुपये, जबकि फर्स्ट एसी में 75 रुपये तक की बचत हो सकती है। यानी स्लीपर क्लास में चार लोगों का परिवार एक यात्रा में 120 रुपये बचा सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा क्यों खत्म किया जा रहा है? दरअसल, रेलवे के निर्धारित मानकों के अनुसार ब्रॉडगेज ट्रैक पर सुपरफास्ट ट्रेन की औसत रफ्तार दोनों दिशाओं में कम से कम 55 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए। जिन ट्रेनों की औसत गति इस मानक से नीचे रहती है, उन्हें सुपरफास्ट श्रेणी में रखने का औचित्य नहीं माना जाता। अतिरिक्त ठहराव, रेल यातायात का दबाव और सिंगल लाइन वाले रेलखंड औसत रफ्तार कम होने की प्रमुख वजह हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य रेलवे की 18 और पूर्व मध्य रेलवे की 20 सेवाएं इस बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं। उत्तराखंड के रेलमार्गों की आठ ट्रेनें भी सूची में शामिल हैं। महानगरी एक्सप्रेस, पुणे-सीएसएमटी प्रगति एक्सप्रेस, एलटीटी-अयोध्या कैंट तुलसी एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का नाम इसमें सामने आया है।
इस बदलाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू है ट्रेन नंबर में परिवर्तन। उदाहरण के तौर पर सप्तक्रांति एक्सप्रेस का नंबर 12557/12558 से बदलकर 15577/15578 किया जा सकता है। वहीं टनकपुर-दिल्ली ट्रेन का नंबर 12035/12036 से बदलकर 15317/15318 होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में यात्रियों को जनवरी की यात्रा की बुकिंग करते समय पुराने ट्रेन नंबर के बजाय अपने रूट के नाम से भी ट्रेन तलाशनी होगी।
हालांकि बदलाव केवल सुपरफास्ट से सामान्य एक्सप्रेस बनने तक सीमित नहीं है। दक्षिण रेलवे की आठ ट्रेनों को सामान्य एक्सप्रेस से सुपरफास्ट श्रेणी में लाया जा रहा है। इनमें चेन्नई एग्मोर-रामेश्वरम और तांबरम-तिरुचिरापल्ली जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज देना पड़ सकता है।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि सुपरफास्ट का दर्जा खत्म होने का मतलब ट्रेन की रफ्तार बढ़ना या यात्रा का समय कम होना नहीं है। यह मुख्य रूप से रेलवे की श्रेणी और किराया व्यवस्था में बदलाव है। अभी सभी प्रभावित ट्रेनों की संशोधित किराया सूची जारी नहीं हुई है। जनवरी के टिकटों पर पहले से वसूले गए सरचार्ज की वापसी होगी या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है।
कुल मिलाकर, रेलवे का यह फैसला यात्रियों की जेब को राहत दे सकता है, लेकिन असली चुनौती बेहतर समयपालन और तेज रेल परिचालन की है। यात्रियों को कुछ रुपये की बचत जरूर होगी, मगर उनकी अपेक्षा सिर्फ सस्ता सफर नहीं, बल्कि समय पर पहुंचने वाली ट्रेन भी है। नए साल में रेलवे के सामने यही दोहरी कसौटी होगी- किराये में राहत और सफर में सहूलियत।





