मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, भोपाल में रात का पारा 7 डिग्री से नीचे
भोपाल। मध्यप्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। सर्दी ने इस बार पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राजधानी भोपाल में रात का तापमान लगातार 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। सर्द हवाओं और गिरते पारे ने लोगों को दिन-रात गर्म कपड़ों में रहने को मजबूर कर दिया है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार ठंड बढ़ने के पीछे कई अहम कारण हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक पहुंच रहा है। उत्तराखंड के कई इलाकों में नदी-नाले और झरने तक जम गए हैं, जिससे वहां से निकलने वाली बर्फीली हवाएं मैदानी क्षेत्रों में सर्दी बढ़ा रही हैं।
इसके साथ ही उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम भी ठंड को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। यह जेट स्ट्रीम जमीन से करीब 12 से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर बह रही है और इसकी रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक बताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब जेट स्ट्रीम इस तरह सक्रिय होती है, तो ठंडी हवाओं का प्रवाह तेज हो जाता है, जिसका सीधा असर मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में देखने को मिलता है।
मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से बह रही ठंडी हवाएं और जेट स्ट्रीम—इन तीनों के संयुक्त प्रभाव से इस बार ठंड का असर दोगुना हो गया है। यही वजह है कि दिसंबर के महीने में भी कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में नवंबर की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि इंदौर में 25 वर्षों में सबसे ज्यादा सर्दी दर्ज की गई। दिसंबर में भी इंदौर की ठंड ने बीते 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
मौसम विभाग ने फिलहाल अगले तीन दिनों के लिए शीतलहर का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है, लेकिन ठंड का असर बने रहने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट भले न हो, लेकिन सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव के सभी उपाय अपनाने की जरूरत है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में दिनभर सर्द हवाएं चलती रहीं। धूप निकलने के बावजूद ठंड का असर कम नहीं हुआ। खासकर शाम ढलते ही ठिठुरन फिर बढ़ गई। सड़कों पर लोग अलाव और गर्म चाय का सहारा लेते नजर आए। बाजारों में भी ऊनी कपड़ों और हीटर-ब्लोअर की मांग तेजी से बढ़ गई है।
इंदौर की ठंड ने इस बार नया रिकॉर्ड बना दिया है। बीते दस वर्षों में इंदौर की रातें सबसे ज्यादा ठंडी दर्ज की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इंदौर का न्यूनतम तापमान प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी के बराबर पहुंच गया है। दोनों स्थानों पर न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आमतौर पर पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका माना जाता है, लेकिन इस बार मैदानी शहर भी उसी स्तर की ठंड झेल रहे हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी कम है। ग्वालियर में रात का तापमान 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया, जो दिसंबर के लिहाज से भी असामान्य माना जा रहा है।
प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी ठंड का असर कम नहीं है। राजगढ़ में न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि नौगांव में 6.4, उमरिया में 6.6 और रीवा में 7 डिग्री सेल्सियस रहा। मलाजखंड में 7.2, मंडला में 7.6 और रायसेन, शिवपुरी व नरसिंहपुर में तापमान 8 डिग्री के आसपास रहा। बैतूल में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा और खजुराहो में 9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। सतना में 9.1, टीकमगढ़ और रतलाम में 9.5, दमोह में 9.8 और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ। आंकड़े साफ बताते हैं कि इस बार ठंड का असर पूरे प्रदेश में एकसमान और तीव्र है।
कड़ाके की ठंड का असर आम जनजीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में सर्दी, खांसी, जुकाम और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह और रात के समय बाहर निकलने से बचने, गर्म कपड़े पहनने और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करने की हिदायत दी जा रही है।





