RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, बजट के बाद पहली मौद्रिक नीति का फैसला

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आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, बजट के बाद पहली मौद्रिक नीति का फैसला

बजट के बाद आरबीआई का पहला फैसला
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्रीय बजट 2026 के बाद अपनी पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह घोषणा तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद की। एमपीसी की बैठक हर दो महीने में होती है, जिसमें देश की मौद्रिक नीति की दिशा तय की जाती है।

फैसला पहले से अनुमानित क्यों था
रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला पहले से अनुमानित माना जा रहा था। इसकी प्रमुख वजह देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद टैरिफ से जुड़े दबावों में कमी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देता है।

भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। मजबूत घरेलू मांग और बेहतर वैश्विक परिस्थितियां देश की विकास रफ्तार को सहारा दे रही हैं।

मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’
आरबीआई ने मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। इसका संकेत है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है और दरें कुछ समय तक निचले स्तर पर बनी रह सकती हैं।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत अर्थव्यवस्था
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विकास की मौजूदा गति लंबे समय तक कायम रह सकती है।

डिजिटल फ्रॉड पर ग्राहकों को राहत की तैयारी
द्विमासिक नीति बयान में गवर्नर ने कहा कि छोटे मूल्य के डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक मुआवजा देने के लिए एक ढांचा प्रस्तावित किया जाएगा। इसके साथ ही मिस-सेलिंग, कर्ज वसूली और रिकवरी एजेंटों के इस्तेमाल को लेकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस भी लाई जाएंगी।

महंगाई के नए अनुमान जारी
महंगाई के मोर्चे पर, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (मार्च–मई 2026) के लिए खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पहले 3.9 प्रतिशत था। इसके बाद वाली तिमाही में महंगाई 4.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।

चालू वित्त वर्ष में महंगाई राहत
चालू वित्त वर्ष, जो अगले महीने समाप्त हो रहा है, उसमें कुल खुदरा महंगाई 2.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वहीं मौजूदा तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 3.2 प्रतिशत लगाया गया है।

जीडीपी वृद्धि दर का आकलन
आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है। अगले वित्त वर्ष में पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण की तस्वीर
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

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