रेमंड ग्रुप को बड़ा आघात: नहीं रहे विजयपत सिंघानिया… अंतिम संस्कार आज…
रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन, एविएशन के शौकीन और पद्म भूषण सम्मानित उद्योगपति का 87 वर्ष की उम्र में निधन
मुंबई से एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के जाने-माने उद्योगपति और Raymond Group के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। परिवार के मुताबिक उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए उन्हें दूरदर्शी नेता, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताया।
कौन थे विजयपत सिंघानिया?
1938 में जन्मे विजयपत सिंघानिया देश के अग्रणी उद्योगपतियों में शामिल थे। उन्होंने 1980 से 2000 तक Raymond Group का नेतृत्व किया और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उनके नेतृत्व में रेमंड ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई।
सिर्फ उद्योगपति नहीं, जुनूनी एविएटर भी थे
विजयपत सिंघानिया की पहचान सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं थी। वे एक उत्साही एविएटर भी थे।उन्होंने हॉट एयर बैलून से सबसे ज्यादा ऊंचाई तक पहुंचने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।1988 में लंदन से दिल्ली तक 23 दिन की माइक्रोलाइट उड़ान पूरी कर इतिहास रचा।उनकी यह उपलब्धियां उन्हें उद्योग जगत से अलग एक रोमांचकारी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती हैं।
सम्मान और उपलब्धियां
उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
इसके अलावा— 2001 में टेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड
1994 में भारतीय वायुसेना द्वारा मानद एयर कमोडोर
2006 में मुंबई के शेरिफ
ये सभी सम्मान उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाते हैं।
2015 में बेटे के साथ विवाद भी रहा चर्चा में
साल 2015 में उन्होंने अपनी 37% हिस्सेदारी बेटे गौतम सिंघानिया को ट्रांसफर कर दी थी। इसके बाद परिवार में विवाद सामने आए, जो समय-समय पर सुर्खियों में रहे। हालांकि इन सबके बावजूद उद्योग और समाज में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाता रहेगा।
आज होगा अंतिम संस्कार
परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार 29 मार्च को मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान में दोपहर 3 बजे किया जाएगा। इससे पहले श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा, जहां परिजन और करीबी उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
एक युग का अंत
विजयपत सिंघानिया का निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने न केवल एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपने जुनून, साहस और दूरदर्शिता से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी छोड़ी।





