अगर रवीना टंडन इंकार न करतीं, तो इस तस्वीर में शाहरुख खान के साथ वही नज़र आतीं। दरअसल रवीना ने पहले यह फ़िल्म साइन कर ली थी, लेकिन बाद में जब अपना शेड्यूल देखा तो पता चला कि उनके पास फ़िल्म पूरी करने के लिए ज़रूरी डेट्स ही नहीं हैं। मजबूरी में उन्हें फ़िल्म छोड़नी पड़ी।
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रवीना–पूजा के बाद सोनाली बनीं हीरोइन
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शाहरुख की फिल्म, तीन बार बदली लीड
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इंग्लिश बाबू देसी मैम: कास्टिंग कहानी
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ट्रिपल रोल वाली शाहरुख फिल्म को 30 साल
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फ्लॉप रही फिल्म, गाने बने यादगार
रवीना के बाद पूजा भट्ट को अप्रोच किया गया। पूजा ने भी फ़िल्म साइन कर ली थी, यानी दूसरी पसंद भी तय हो चुकी थी। मगर पूजा को लगा कि फ़िल्म समय पर फ़्लोर पर नहीं जा पाएगी, इसलिए उन्होंने भी इससे किनारा कर लिया। आख़िरकार यह फ़िल्म सोनाली बेंद्रे के हिस्से आई — और उन्होंने इसे पूरा भी किया।
यह शाहरुख खान और सोनाली बेंद्रे की पहली साथ की फ़िल्म थी। इसके बाद दोनों 1998 की डुप्लीकेट में फिर साथ दिखे। 2003 की कल हो ना हो में भी सोनाली नज़र आईं, लेकिन इस बार शाहरुख की हीरोइन नहीं, बल्कि उनकी डॉक्टर के छोटे से रोल में।
जिस फ़िल्म की बात हो रही है, उसका नाम है “इंग्लिश बाबू देसी मैम”। इस फ़िल्म में शाहरुख खान ट्रिपल रोल में थे। आज इस फ़िल्म के 30 साल पूरे हो गए हैं। 26 जनवरी 1996 को रिलीज़ हुई इस फ़िल्म को एक्टर नवीन निश्चल के छोटे भाई प्रवीन निश्चल ने डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था।
बताया जाता है कि फ़िल्म का बजट करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये था और नेट कलेक्शन लगभग 3 करोड़ 78 लाख रुपये, जिसके चलते इसे फ़्लॉप माना गया — हालांकि इन आंकड़ों की सटीकता पर खुद मुझे भी पूरा भरोसा नहीं है। फ़िल्म का संगीत निखिल-विनय ने दिया था। कुल 7 गाने थे, जिनमें से 6 गीत योगेश जी ने और 1 गीत रानी मलिक जी ने लिखा था।
फ़िल्म का मशहूर गाना “कैसे मुखड़े से नज़र हटाऊँ”, असल में नुसरत फ़तेह अली ख़ान की कव्वाली “कीवें मुखड़े तौं नज़र हटावां” से प्रेरित था। इंग्लिश बाबू देसी मैम साल 1960 की हॉलीवुड फ़िल्म “It Started in Naples” का अडैप्टेशन थी, जिसमें क्लार्क गेबल और सोफ़िया लॉरेन जैसे दिग्गज थे। फ़िल्म के अन्य प्रमुख कलाकार थे — किरण कुमार, सईद जाफ़री, विवेक वासवानी, सुधीर दलवी, अंजू महेंद्रू, मुश्ताक खान और राजेश्वरी सचदेव।





